विदेश की खबरें | सूडान के शीर्ष जनरल ने कहा, सेना असैन्य शासन के लिए प्रतिबद्ध है
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

इसे स्पष्ट तौर पर अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। दोनों पक्षों में हो रही जंग ने देश में लोकतांत्रिक परिवर्तन की संभावनाओं को पटरी से उतार दिया है।

लगभग एक सप्ताह पहले सूडान में शुरू हुए संघर्ष के बाद अपने पहले भाषण में सेना प्रमुख जनरल अब्देल फतह बुरहान ने संकल्प जताया कि सेना मजबूत बनकर उभरेगी और विशाल अफ्रीकी राष्ट्र में “असैन्य शासन को सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण” सुनिश्चित करेगी।

कई सूडानी लोगों को बुरहान का दावा खोखला नजर आया, क्योंकि उन्होंने 18 महीने पहले सूडान की लोकतंत्र समर्थक ताकतों का तख्तापलट कर सत्ता पर काबिज होने के लिए अपने मौजूदा प्रतिद्वंद्वी के साथ हाथ मिला लिया था।

बुरहान की यह घोषणा ईद अल-फितर के अवकाश के मौके पर आई है। आम तौर पर इस पर्व पर इबादत, उत्सव और खाने-पीने का जिक्र होता है, लेकिन इस बार सूडान में हालात ऐसे नहीं हैं। राजधानी खार्तूम में गोलियों की आवाज गूंज रही है और जगह-जगह आसमान में धुएं का गुबार उठता नजर आ रहा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, हिंसा में अब तक 413 लोगों की जान जा चुकी है और 3,551 लोग घायल हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष के अनुसार, मरने वालों में नौ बच्चे भी शामिल हैं।

खार्तूम में शुक्रवार सुबह अजान की अवाज की जगह गोलियों और बम धमाकों की आवाज से लोगों की नींद टूटी।

सूडान में नॉर्वे के राजदूत एंड्रे स्टेन्सन ने ट्विटर पर लिखा, “क्या इससे भयानक भी कोई नरक हो सकता है?”

संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका समेत कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। अर्धसैनिक ‘रैपिड सपोर्ट फोर्सेज’ ने ईद अल-फितर के मौके पर तीन दिन के लिए संघर्ष रोकने का वादा किया है, जिससे लोगों को सुरक्षित निकलने के लिए मौका मिल सके। बुरहान की सेना ने हालांकि ऐसी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

सूडानी सेना ने एक दिन पहले आरएसएफ के साथ बातचीत से इनकार करते हुए कहा था कि वह केवल उसके आत्मसमर्पण को स्वीकार करेगी।

सेना ने शुक्रवार को दावा किया कि वह रक्षात्मक चरण से आगे बढ़ चुकी है और अब खार्तूम के आसपास से आरएसएफ के ठिकानों को साफ कर रही है।

अक्टूबर 2021 में तख्तापलट कर देश की बागडोर अपने हाथों में लेने वाले बुरहान और उनके प्रतिद्वंद्वी, रैपिड सपोर्ट फोर्स के जनरल मोहम्मद हमदान डगलो ने बार-बार दोहराया है कि जब तक असैन्य सरकार का चुनाव नहीं हो जाता, तब तक वे देश की रक्षा करेंगे।

हालांकि, दोनों ही राजनीतिक समझौतों पर हस्ताक्षर करने में विफल रहे हैं, जिसकी वजह से उनकी संस्थाएं सत्ता खो देतीं। दोनों पक्षों के बीच मध्य खारतूम और देश के अन्य हिस्सों में संघर्ष जारी है।

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