पूर्वोत्तर अफ्रीकी देश सूडान आईसीजे से आपातकालीन आदेश जारी करने का अनुरोध कर रहा है।
इस अनुरोध को अनंतिम उपाय के रूप में जाना जाता है, जिसमें यूएई को सूडान के दो साल के गृहयुद्ध के दौरान मसालित लोगों को निशाना बनाकर की गई हत्या और अन्य अपराधों को रोकने के लिए हरसंभव प्रयास करने के लिए कहना भी शामिल है।
कार्यवाहक न्याय मंत्री मुआविया उस्मान ने यहां आईसीजे में अपनी शुरुआती दलील में कहा, मसालित के खिलाफ नरसंहार ‘रैपिड सपोर्ट फोर्स’ द्वारा किया जा रहा है, जिसके बारे में माना जाता है कि वह दारफुर के अरबी नागरिक हैं, और इसमें यूएई का समर्थन और मिलीभगत है।’’
सुनवाई से पहले एक ब्रीफिंग में यूएई के विदेश मंत्रालय की एक शीर्ष अधिकारी रीम केटेट ने पत्रकारों से कहा कि मामला निराधार है।
केटेट ने कहा, "यह कोई वैध कानूनी कार्रवाई नहीं है; यह एक निंदनीय और निराधार पीआर स्टंट है, जिसे सूडानी सशस्त्र बलों के अत्याचारों के अपने भयावह रिकॉर्ड से ध्यान हटाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।"
सूडान और यूएई दोनों ही 1948 के नरसंहार संधि के हस्ताक्षरकर्ता हैं।
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