देश की खबरें | अध्ययन ने जलवायु परिवर्तन के संबंध में बाजारे की खेती का नया मानचित्र पेश किया

नयी दिल्ली, नौ सितंबर शोधकर्ता जलवायु परिवर्तन के संबंध में भारत में 'बाजरे' की खेती के मानचित्र की फिर से समीक्षा करने की बात कर रहे हैं।

मौसम के बदलते मिजाज और विकसित होती कृषि प्राथमिकताओं के बीच, वे मूल रूप से 1979 में स्थापित बाजरे की खेती के क्षेत्रों को नियंत्रित करने वाले वर्गीकरण मानदंडों में समय पर संशोधन की मांग कर रहे हैं।

उन्होंने हैदराबाद स्थित इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टिट्यूट फॉर द सेमी-एरिड ट्रॉपिक्स (आईसीआरआईएसएटी), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और बाजरा पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना के अध्ययन में प्रस्तावित बदलाव पेश किए हैं।

शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन के लिए आईसीआरआईएसएटी के जिला स्तरीय डेटाबेस से डेटा का उपयोग किया। यह अध्ययन एग्रोनॉमी पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

अध्ययन में परिवर्तनों के आधार पर ए जोन का पुनर्मूल्यांकन करने का सुझाव दिया गया है, जिसे मानचित्र में उत्तर और मध्य भारत में अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में स्थित दिखाया गया है, जबकि जोन ए1 का विस्तार राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों में है। जोन बी दक्षिण भारत में भारी मिट्टी वाले अर्ध-शुष्क क्षेत्रों को दर्शाता है।

अध्ययन में कहा गया है कि ये क्षेत्र वर्तमान में वर्षा और मिट्टी के प्रकार पर आधारित हैं।

आईसीआरआईएसएटी में शोध कर रहे और अध्ययन के लेखकों में से एक विंसेंट गारिन ने कहा, ‘‘मौजूदा जोन ए को तीन अलग जोन-जी, एई1 और एई2 में बांट सकते हैं। जोन जी के तहत गुजरात, एई1 के तहत पूर्वी राजस्थान और हरियाणा और जोन एई2 के तहत उत्तर प्रदेश आएगा।

गारिन ने कहा, ‘‘प्रस्तावित नये जोन बदलती जलवायु स्थितियों के जवाब में प्रणाली की जटिलता को ध्यान में रखकर निर्धारित किए गए हैं। जबकि ए1 और बी जोन के लिए मौजूदा जोन आम तौर पर अब भी लागू है, सुझाव ए जोन को संशोधित करने का है।’’

अध्ययन में कहा गया है कि जोन संबंधी नये ढांचे के मुताबिक, जोन एई1 भारत में बाजार उत्पादन के लिहाज से सबसे प्रमुख है जहां इस फसल के अनुकूल जलवायु और मिट्टी उपलब्ध है।

इसमें कहा गया कि जोन एई2 दिखाता है कि फसल के उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है।

अध्ययन के मुताबिक, जोन जी में जलवायु परिवर्तन के कारण अधिक बारिश हुई, जो किसानों को नकदी फसलों की राह दिखा सकता है। ऐसे जोन में बाजरे की खेती केवल गर्मी के मौसम तक सिमट सकती है।

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