चेन्नई, 18 जून तमिलनाडु में कोरोना वायरस महामारी को रोकने के लिए लागू बंद में रियायत दिए जाने के बाद से सड़क दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ी है और इसे रोकने के लिए कई तबकों से यह आवाज आ रही है कि कड़े सुड़क सुरक्षा नियम और मानक संचालन प्रक्रिया को लागू किया जाए।
हालांकि इन लोगों की चिंताएं भी बिना वजह नहीं है। तमिलनाडु में बंद के नियमों में छूट मिलने के 17 मई के बाद से ही सड़क दुर्घटनाएं बढ़ी हैं। अप्रैल में ऐसी दुर्घटनाओं में भारी कमी आई थी।
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कोविड-19 महामारी ने जीवनशैली को बेहद प्रभावित किया है और ऐसे में सड़कों पर बेहतर और सुरक्षित यातायात व्यवस्था मौजूद होना बेहद जरूरी हो गया है। देश में 24 मार्च को बंद लागू करने के बाद से प्वासी श्रमिकों को उनके स्थानों तक ले जा रहे वाहनों से जुड़े सड़क दुर्घटना के कई मामले पूरे देश में सामने आए।
नागरिक उपभोक्ता एवं नगर कार्य समूह (सीएजी), चेन्नई की निदेशक एस सरोजा ने कहा, ‘बंद के दौरान सड़कें अपेक्षाकृत खाली थीं, तो लोग तेजी से वाहन चला रहा थे। और बंद के बाद दुर्घटनाएं बढ़ने का अनुमान लगाया जा सकता है क्योंकि लोग सड़कों पर आएंगे और वह तेजी से गाड़ी चलाना चाहेंगे।’’
इस वजह से सड़क का इस्तेमाल करने वाले लोग बेहद प्रभावित हो सकते हैं। राज्य सरकार को सड़क सुरक्षा नियम लागू करना चाहिए जिसका पालन सड़क का इस्तेमाल करने वाले लोग करें।
सड़क दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी का अंदाजा लोगों की मौत से ही लगाया जा सकता है। अप्रैल में 119 लोगों की मौत हुई जो कि पिछले साल इसी महीने हुई मौत की अपेक्षा 87 फीसदी कम थी। वहीं मई, 2020 में 548 लोगों की मौत हुई।
इनमें से ज्यादा लोगों की मौत मई के चौथे सप्ताह में हुआ है क्योंकि लोग घरों की जरूरतों और अन्य कामों से घरों से बाहर निकलकर सड़कों पर आना-जाना शुरू कर रहे थे।
सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े मामले देखने वाले वकील ई श्रीनिवास ने कहा, ‘‘ बसों को संक्रमण मुक्त करने की सरकार की कोशिशों के बाद भी सार्वजनिक यायातात चिंता का विषय बना हुआ है क्योंकि लोग अब भी कोरोना वायरस महमारी की वजह से इसे असुरक्षित मानते हैं।’’
लोग आशंकाओं की वजह से अपने निजी वाहनों से ही लंबी दूरी की भी यात्रा करना बेहतर समझते हैं जबकि महमारी के पहले लोग ऐसा नहीं कर रहे थे।
वहीं सरोजा ने कहा कि वह तमिलनाडु सरकार से अपील करती हैं कि बंद के बाद की योजना में सड़क सुरक्षा के मुद्दे को भी शामिल किया जाए।
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