रूसी सेना ने हाल में इलाके के कस्बों और गांवों को अपने शिकंजे में ले लिया है। पाव्लोग्राड कन्सर्ट हॉल को ऐसे स्थानीय नागरिकों के लिए एक अस्थायी केंद्र के रूप में तब्दील कर गया है, जहां लगातार रूसी बमबारी से बचकर भाग रहे लोग शरण ले रहे हैं।
कटरीना ओद्राहा (83) ने कहा, ‘‘यहां सब अच्छा है। यहां खाना, गर्मी और नहाने-धोने की जगह है।’’
कटरीना वह भी दौर देख चुकी हैं जब द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उनके गांव पर नाज़ी जर्मन का कब्जा था।
लेकिन यह शरणस्थल अब खतरे में पड़ सकता है।
इस आश्रय गृह को चलाने में प्रति माह 7,000 अमेरिकी डॉलर का खर्च आता है और इसका 60 प्रतिशत खर्च यूक्रेन की मदद के लिए भेजे गए अमेरिकी फंड से पूरा किया जा रहा है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले सप्ताह अन्य देशों को अमेरिका द्वारा प्रदान की जाने वाली मानवीय सहायता को 90 दिनों के लिए स्थगित करने का जो निर्णय लिया था उसका असर कई देशों में महसूस किया गया। इस निर्णय से प्रभावित स्थानों में पूर्वी यूक्रेन में अग्रिम मोर्चे से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह शरणस्थली भी शामिल है।
ट्रंप के इस फैसले से हजारों अमेरिकी वित्तपोषित मानवीय, विकास और सुरक्षा कार्यक्रम तत्काल रूक गये। दुनियाभर में इसके परिणाम महसूस किये जा रहे हैं।
परमार्थ संगठन ‘रिलीफ कोऑर्डिनेशन सेंटर’ द्वारा संचालित यहां इस ट्रांजिट सेंटर के समन्वयक इलिया नोविकोव ने कहा, ‘‘यह खबर अचानक और अप्रत्याशित थी। इस समय, हमें नहीं पता कि भविष्य में क्या होगा।’’
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