चेन्नई, 30 जून भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तमिलनाडु इकाई ने शुक्रवार को कहा कि 2018 में विपक्ष में रहने के दौरान द्रमुक ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अन्नाद्रमुक के एक तत्कालीन मंत्री को बर्खास्त करने की मांग की थी और जानना चाहा कि बर्खास्तगी पर राज्यपाल के कदम का विरोध करते हुए मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने अब अलग रुख क्यों अपनाया है।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने कहा उनकी पार्टी इस मुद्दे पर नहीं जाना चाहती कि राज्यपाल के पास मंत्रिमंडल से मंत्री को अपने विवेकानुसार बर्खास्त करने की शक्ति है, या नहीं।
गौरतलब है कि राज्यपाल आर. एन. रवि ने बृहस्पतिवार को वी. सेंथिल बालाजी को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया।
अन्नामलाई ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि एम. करुणानिधि बनाम भारत संघ (1979) पर उच्चतम न्यायालय का फैसला भले ही राज्यपाल द्वारा मंत्री की बर्खास्तगी से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ ना हो, लेकिन यह उनके (राज्यपाल के) नियुक्ति और बर्खास्तगी के अधिकारों से संबद्ध है।
तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष का नेता रहने के दौरान स्टालिन ने सितंबर 2018 में मांग की थी कि अगर (तत्कालीन) मुख्यमंत्री (ई. के.पलानीस्वामी) ऐसा करने से हिचक रहे हैं, तो भ्रष्टाचार के मुद्दे पर राज्यपाल तत्कालीन मंत्री विजयभास्कर को बर्खास्त कर दें।
उस साल स्टालिन ने भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर अन्नाद्रमुक सरकार और उसके मंत्रियों को बर्खास्त करने की मांग भी की थी।
अन्नामलाई ने कहा, भाजपा यह जानना चाहती है कि स्टालिन पांच साल में अपना रुख कैसे बदल सकते हैं और अब वह राज्यपाल द्वारा मंत्री को बर्खास्त करने के कदम को गलत कैसे बता सकते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘यह मामला अदालत में ही सुलझेगा।’’ उन्होंने यह भी जानना चाहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा इस मामले में स्पष्ट टिप्पणी किये जाने के बावजूद स्टालिन, सेंथिल बालाजी का ‘बचाव’ क्यों कर रहे हैं।
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