देश की खबरें | किसी फैसले के खिलाफ अपील सुनने की विशेष शक्ति का प्रयोग संयम से करना होगा : न्यायालय

नयी दिल्ली, 15 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि किसी भी फैसले के खिलाफ अपील की सुनवाई करने के लिए संविधान प्रदत्त विशेष शक्ति का उपयोग संयम के साथ किया जाना चाहिए ताकि किसी के साथ अन्याय नहीं हो।

संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत उच्चतम न्यायालय देश के किसी न्यायालय या अधिकरण द्वारा किसी वाद या मामले में पारित किए गए आदेश के खिलाफ अपील के लिए विशेष अनुमति दे सकता है।

न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने एक फैसले में यह टिप्पणी की। इसके साथ ही पीठ ने मेकला सिवैया की अपील को खारिज कर दिया।

आंध्र प्रदेश में अमरावती के पास एक सब्जी मंडी में छह सितंबर, 2006 को एक किसान की चाकू मारकर हत्या मामले में निचली अदालत और उच्च न्यायालय दोनों ने मेकला सिवैया को दोषी ठहराया था और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

सिवैया ने उस फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील की थी जिसे खारिज कर दिया गया।

न्यायमूर्ति मुरारी ने फैसला लिखते हुए कहा कि यह दोहराना महत्वपूर्ण है कि संविधान के अनुच्छेद 136 इस न्यायालय के विशेष अधिकार से संबंधित है और उच्चतम न्यायालय इस अधिकार का प्रयोग उस समय करता है जब वह संतुष्ट हो कि अन्याय रोकने के लिए हस्तक्षेप आवश्यक है।

फैसले में उच्चतम न्यायालय की भूमिका के बारे में विस्तार से जिक्र करते हुए कहा गया है कि यह प्रत्येक आपराधिक मामले में नियमित अपीलीय अदालत के रूप में काम नहीं करता है।

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