देश की खबरें | एनआईए मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों की जरूरत: उच्चतम न्यायालय

नयी दिल्ली, 23 मई उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को एनआईए मामलों की सुनवाई के लिए समर्पित अदालतें बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उसने केंद्र की ओर से लागू कानूनों और राज्यों की ओर से बनाए जाने वाले संभावित कानूनों के “न्यायिक ऑडिट” का भी आह्वान किया।

न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) को सौंपे गए मामले जघन्य प्रवृत्ति के होते हैं और पूरे भारत में ऐसे मामले लंबित हैं।

शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसे हर मामले में सैकड़ों गवाह होते हैं और सुनवाई अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाती है, क्योंकि अदालत के पीठासीन अधिकारी अन्य मामलों में व्यस्त रहते हैं।

पीठ ने कहा, “कानून के लागू होने से उत्पन्न होने वाले संभावित मामलों के न्यायिक ऑडिट के अभाव के चलते ऐसे मामलों की सुनवाई से अदालत पर बोझ बढ़ गया है।”

शीर्ष अदालत ने कहा कि एकमात्र उचित उपाय यह है कि विशेष अदालतें स्थापित की जाएं, जहां केवल विशेष कानूनों से जुड़े मामलों की दैनिक आधार पर सुनवाई की जा सके।

पीठ ने कहा, “अतिरिक्त अदालतों और अपेक्षित बुनियादी ढांचे के विकास का निर्णय लेने का काम कार्यपालिका के नीतिगत क्षेत्र में आता है, जिसे लंबित मामलों का डेटा प्राप्त करने के बाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से किया जाना चाहिए।”

सर्वोच्च न्यायालय ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल राजकुमार भास्कर ठाकरे को निर्देश प्राप्त करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया और मामले की अगली सुनवाई जुलाई में निर्धारित की।

शीर्ष अदालत महाराष्ट्र के गढ़चिरौली के रहने वाले कथित नक्सल समर्थक कैलाश रामचंदानी की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। वर्ष 2019 में एक आईईडी विस्फोट में त्वरित प्रतिक्रिया दल के 15 पुलिसकर्मियों के मारे जाने के बाद रामचंदानी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र के गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी की थी, जिसमें उन मामलों की सुनवाई के लिए एक अदालत को विशेष अदालत के रूप में नामित किया गया था, जिनकी जांच एनआईए ने की है।

हालांकि, पीठ ने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श किए बिना यह कदम उठाए जाने पर सवाल उठाया।

न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने पूछा, “क्या नामित न्यायालय के पीठासीन अधिकारी एनआईए मामलों के अलावा अन्य मामलों की भी सुनवाई जारी रखेंगे? अन्य मामलों का क्या होगा? क्या उन मामलों में सुनवाई में देरी नहीं होगी? क्या आपने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श किया है?”

पीठ ने ऐसे मामलों की दैनिक आधार पर सुनवाई के लिए अतिरिक्त अदालतों और आवश्यक बुनियादी ढांचे के विकास की आवश्यकता पर जोर दिया।

उसने ठाकरे से महाराष्ट्र और पूरे भारत में लंबित एनआईए मामलों का ब्योरा पेश करने तथा विशेष अदालतें स्थापित करने के सिलसिले में निर्देश प्राप्त करने को कहा।

पीठ ने रामचंदानी को जमानत देने से फिलहाल इनकार कर दिया।

उसने कहा, “अदालत केवल आपके मुकदमे की सुनवाई में तेजी लाने में दिलचस्पी रखती है।”

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