देश की खबरें | लोकसभाध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति आईटी समिति की रिपोर्ट पेश करने की अनुमति ना दें: माकपा सांसद

नयी दिल्ली, 30 जुलाई मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सांसद जॉन ब्रिटास ने लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति से आग्रह किया है कि वे डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक पर टिप्पणी करने वाली संसदीय समिति की रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखने की अनुमति ना दें। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस विधेयक को समिति में कभी भेजा ही नहीं गया।

दोनों सदनों के नियमों का हवाला देते हुए उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ को लिखे अपने पत्र में कहा कि संसदीय स्थायी समितियों को ऐसे किसी भी विधेयक की समीक्षा करने से स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित किया गया है, जिसे पेश किए जाने के बाद राज्यसभा के सभापति या लोकसभा अध्यक्ष द्वारा उसके (समिति) पास नहीं भेजा गया है।

ब्रिटास ने कहा, ‘‘यह ध्यान रखना जरूरी है कि उक्त डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक को आज तक ना तो संसद के किसी भी सदन के समक्ष पेश किया गया है और ना ही इसे राज्यसभा के सभापति या अध्यक्ष द्वारा जांच के लिए स्थायी समिति के पास भेजा गया था।’’

केरल के सांसद ब्रिटास, शिवसेना सांसद प्रतापराव जाधव की अध्यक्षता वाली संचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति के सदस्य हैं।

ब्रिटास ने कहा, ‘‘यह स्पष्ट है कि संचार और सूचना प्रौद्योगिकी पर स्थायी समिति की रिपोर्ट, जिसे 26 जुलाई, 2023 को अंगीकार किया गया है, शुरू से ही अमान्य है (जिसकी कोई कानूनी वैधता नहीं है) और नियमों द्वारा प्रदत्त स्थायी समिति की शक्तियों के विपरीत है।’’

समिति ने 26 जुलाई की बैठक में ब्रिटास सहित कई विपक्षी सदस्यों के बहिष्कार के बीच रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया था, जिसमें केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा हाल ही में मंजूर किए गए विधेयक का अनुकूल उल्लेख किया गया था। इन विपक्षी सदस्यों ने रिपोर्ट का विरोध किया था।

समिति में भाजपा सदस्यों ने विपक्षी सांसदों द्वारा उठाई गई आपत्तियों को खारिज करते हुए जोर देकर कहा था कि समिति की कार्रवाई नियमों के अनुसार है।

ब्रिटास ने 28 जुलाई को लिखे अपने पत्र में कहा, ‘‘इसमें कोई संदेह नहीं है कि इस विधेयक पर टिप्पणियों और सिफारिशों को शामिल करने की समिति की कठोर कार्रवाई उसके अधिकार क्षेत्र से परे है और इसलिए रिपोर्ट रद्द किये जाने योग्य है।’’

उन्होंने बिरला और धनखड़ से आग्रह किया कि वे अपने-अपने संबंधित सदन में रिपोर्ट पेश करने की अनुमति देने से बचें और 'अधिकार क्षेत्र से हटाए जाने के मामले' का हवाला देते हुए इसे स्थायी समिति को वापस भेजें।

संसद के मौजूदा मानसून सत्र में डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक पर चर्चा होने की संभावना है।

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