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जरुरी जानकारी | कुछ खाद्य तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. विदेशी बाजारों में गिरावट के रुख के बीच दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में सोमवार को सरसों तेल, सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल कीमतों में गिरावट दर्ज हुई जबकि उपज कम रहने और त्योहारी मांग की सुगबुगाहट के बीच सरसों तिलहन, मूंगफली तेल-तिलहन और बिनौला तेल कीमतें पूर्वस्तर पर बंद हुईं।

जरुरी जानकारी | कुछ खाद्य तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट

नयी दिल्ली, सात अगस्त विदेशी बाजारों में गिरावट के रुख के बीच दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में सोमवार को सरसों तेल, सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल कीमतों में गिरावट दर्ज हुई जबकि उपज कम रहने और त्योहारी मांग की सुगबुगाहट के बीच सरसों तिलहन, मूंगफली तेल-तिलहन और बिनौला तेल कीमतें पूर्वस्तर पर बंद हुईं।

शिकॉगो एक्सचेंज और मलेशिया एक्सचेंज में फिलहाल गिरावट चल रही है।

बाजार सूत्रों ने कहा कि कुछ खाद्य तेल कीमतों में गिरावट दर्ज होने की वजह खाद्य तेलों का अत्यधिक आयात होना है। देश के आयातक सोयाबीन और सूरजमुखी तेल का जरूरत से कई गुना अधिक आयात करते हैं और उसी तेल को आयात लागत से 5-7 रुपये के नुकसान पर बेच रहे हैं। नुकसान की भरपाई के लिए वे बैंकों से अपने ऋण की सीमा बढ़वा लेते हैं और कुल मिलाकर यह चक्र निरंतर चलता रहता है और अंतत: बैंकों का ऋण ही फंसता है जो आम जनता का ही पैसा है।

उन्होंने कहा कि कांडला पोर्ट पर आयातक को सूरजमुखी तेल 1,055-1,060 डॉलर प्रति टन के भाव पड़ता है। यानी प्रति किलो के हिसाब से यह खरीद भाव 95 रुपये किलो बैठता है और बंदरगाह पर इसी तेल का बिक्री का भाव है 88 रुपये किलो। इसी प्रकार, आयात होने वाले सोयाबीन तेल का खरीद भाव पड़ता है 91-91.50 रुपये किलो और इसका बिक्री भाव है 87 रुपये किलो। सरकार को इन बाजार की गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिये और बैंकों का ऋण नहीं फंसने का पुख्ता इंतजाम करना चाहिये।

सस्ते आयातित तेलों की बाढ़ से देशी तिलहन किसान और देश का तेल उद्योग तो त्रस्त है ही लेकिन उपभोक्ताओं को भी इस सस्तेपन का लाभ नहीं मिल रहा। बड़ी कंपनियों द्वारा निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) काफी ज्यादा होने के कारण उपभोक्ताओं को ये तेल महंगा ही खरीदना पड़ रहा है।

सूत्रों ने कहा कि देश के तेल संगठनों को सरकार को परामर्श देना चाहिये कि अगर वह खाद्य तेलों को सस्ता बिकवाना चाहती है तो उसे बंदरगाहों पर पैकरों से इन सस्ते आयातित तेलों की पैकिंग करवाकर राशन के साथ-साथ बाकी अन्य दुकानेां पर भेजने के लिए पैकरों से निविदा मंगावानी चाहिये।

सूत्रों ने कहा कि इन तेल संगठनों को सरकार को यह भी बताना चाहिये कि देश के सरसों तथा हरियाणा व पंजाब के सूरजमुखी तिलहन किसानों को भारी नुकसान है जिनके माल सस्ते आयातित तेलों की भरमार के बीच मंडियों में बिक नहीं रहे।

सोमवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन - 5,800-5,850 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली - 7,775-7,825 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 18,750 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,725-3,010 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 11,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 1,820 -1,915 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 1,820 -1,930 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 10,400 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 10,150 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 8,700 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 8,225 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 9,725 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,400 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 8,500 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना - 5,065-5,160 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 4,830-4,925 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का)- 4,015 रुपये प्रति क्विंटल।

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(The above story first appeared on LatestLY on Aug 07, 2023 08:56 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).