जरुरी जानकारी | उत्तराखंड में सौर स्वरोजगार योजना की शुरूआत

देहरादून, आठ अक्टूबर उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बृहस्पतिवार को सौर उर्जा पर आधारित स्वरोजगार योजना की शुरूआत की।

मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत संचलित इस योजना में 10 हजार युवाओं व उद्यमियों को 25-25 किलोवाट की सौर परियोजनाएं आबंटित की जाएंगी। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में मिलने वाले सभी लाभ इस योजना के विकासकर्ताओं को भी मिलेंगे ।

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प्रदेश के युवाओं और वापस लौटे प्रवासियों को स्वरोजगार उपलब्ध कराने के साथ ही हरित ऊर्जा के उत्पादन को बढ़ावा देना योजना का लक्ष्य है।

इस योजना में बैंकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए मुख्यमंत्री रावत ने जिलाधिकारियों से बैंकों से लगातार सम्पर्क और समन्वय बनाए रखने को कहा।

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रावत ने कहा कि योजना के आवेदन प्रक्रिया को सरल रखा जाए और भूमि उपयोग में बदलाव में एक सप्ताह से अधिक समय नहीं लगे। उन्होंने कहा कि इससे अधिक समय लगने पर संबंधित इकाई के विरूद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

प्रदेश की ऊर्जा सचिव राधिका झा ने बताया कि राज्य के युवाओं और वापस लौटे प्रवासियों को स्वरोजगार उपलब्ध कराने के साथ ही हरित ऊर्जा के उत्पादन को बढ़ावा देना इस योजना का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि इसमें 25 किलोवाट क्षमता के ही सौर संयंत्र लगाने की अनुमति दी जाएगी। राज्य के स्थाई निवासी अपनी निजी भूमि या पट्टे पर भूमि लेकर सौर बिजली संयंत्र की स्थापना कर सकते हैं।

इंटीग्रेटेड फार्मिंग की इस योजना में सौर पैनल लगाने के साथ उसी भूमि पर फल, सब्जी और जड़ी-बूटी आदि का उत्पादन भी किया जा सकता है। संयंत्र स्थापित की जाने वाली भूमि पर जलवायु आधारित औषधीय और अन्य पादपों के बीज नि:शुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे।

योजना में 10 हजार परियोजनाएं पात्र आवेदकों को आबंटित किए जाने का लक्ष्य है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग के पोर्टल के माध्यम से इच्छुक पात्र व्यक्ति आवेदन कर सकते हैं और इसमें शैक्षिक योग्यता की कोई बाध्यता नहीं है। योजना का क्रियान्वयन उरेडा (उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण) द्वारा किया जाएगा।

पच्चीस किलोवाट क्षमता के संयंत्र लगाने के लिए 40 हजार रूपए प्रति किलोवाट की दर से कुल 10 लाख रुपये की संभावित लागत की जरूरत है। राज्य में औसतन धूप की उपलब्धता के आधार पर 25 किलोवाट क्षमता के संयंत्र से पूरे वर्ष में लगभग 38 हजार यूनिट विद्युत उत्पादन हो सकता है।

योजना के अंतर्गत आबंटित परियेजना से उत्पादित बिजली को राज्य सरकार की विद्युत वितरण कंपनी निर्धारित दरों पर 25 वर्षों तक खरीदेगी। इसके लिए संबंधित लाभार्थी के साथ बिजली खरीद अनुबंध (पीपीए) किया जाएगा।

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