सिंगापुर, 28 नवंबर सिंगापुर के उच्च न्यायालय ने मंगलवार को प्रधानमंत्री ली हसीन लूंग के छोटे भाई ली हसीन यांग को सोशल मीडिया पर भारतीय मूल के दो मंत्रियों के खिलाफ अपमानजनक आरोप लगाने को लेकर उन्हें हर्जाना भरने का आदेश दिया।
मानहानि का यह मामला कानून एवं गृहमंत्री के षणमुगम और विदेश मंत्री विवियान बालकृष्णन द्वारा दो सरकारी बंगले को किराये पर देने के संबंध में यांग द्वारा लगाये गये आरोपों पर आधारित है।
स्ट्रेट टाईम्स अखबार के अनुसार यांग अपने विरूद्ध मानहानि के इस वाद में अपनी बात रखने में विफल रहे और उच्च न्यायालय ने मंगलवार को इन दोनों मंत्रियों के पक्ष में फैसला सुनाया।
अखबार ने कहा कि अदालत हर्जाने की राशि अगली सुनवाई में तय करेगा।
न्यायाधीश ने यांग पर झूठे और मानहानिकारक आरोपों के और प्रकाशन एवं प्रसार पर भी रोक लगा दी।
षणमुगम ने 27 जुलाई को अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा था कि यांग ने उनपर और बालकृष्णन पर ‘भ्रष्ट तरीके से और निजी फायदे के लिए काम करने’ का आरोप लगाया है।
षणमुगम के अनुसार यांग ने उन दोनों पर आरोप लगाया कि बिना अनुमति के पेड़ों को अवैध रूप से काटकर सिंगापुर भूमि प्राधिकरण (एसएलए) ने उनके साथ पक्षधरता की तथा यह कि एसएलए से 26 और 31 ‘रिडआउट रोड’ के सौंदर्यीकरण के वास्ते उन्हें पैसे मिले। यांग फिलहाल ब्रिटेन में हैं।
चैनल न्यूज एशिया के अनुसार, षणमुगम और बालकृष्णन ने 23 जुलाई, को फेसबुक पर टिप्पणी करने को लेकर यांग पर मुकदमा कर दिया। यांग ने 23 जुलाई को फेसबुक पर लिखा था, ‘‘दोनों मंत्रियों ने एक ऐसी एजेंसी से सरकारी बंगलों को लीज पर दिया जिसमें उनमें से एक का नियंत्रण है और यह कि पेड़ कटवाये एवं सरकार के खर्च पर सौंदर्यीकरण करवाया।’’
न्यूज एशिया की खबर के मुताबिक भ्रष्टाचार जांच ब्यूरो को इनमें कोई गड़बड़ी नजर नहीं आयी।
राजकुमार रंजन
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