नयी दिल्ली, सात जुलाई दिल्ली में आयोजित एक राष्ट्रीय सिख समागम के दौरान समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मुद्दे पर सरकार के साथ बातचीत के लिए शुक्रवार को 11 सदस्यीय दल गठित किया गया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सिखों के अधिकारों और प्रथाओं से छेड़छाड़ न हो। एक पदाधिकारी ने यह जानकारी दी।
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति (डीएसजीएमसी) के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने कहा कि केंद्र सरकार ने अभी यूसीसी का मसौदा जारी नहीं किया है, इसलिए ‘‘इस तरह का कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि इसका समर्थन किया जाए या विरोध किया जाए।’’
समिति ने एक बयान में कालका के हवाले से कहा कि समागम में यह फैसला किया गया कि मसौदे को देखे बिना, इसका विरोध करना उचित नहीं है।
रकाबगंज गुरुद्वारे में आयोजित सिख समागम के बाद कालका ने प्रेसवार्ता में कहा कि यूसीसी को लेकर केंद्र सरकार के साथ बातचीत करने के लिए 11 सदस्यीय समिति का गठन किया गया है।
उन्होंने कहा कि इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सिखों के अधिकारों और उनकी धार्मिक प्रथाओं के साथ कोई छेड़छाड़ न हो।
बयान में कहा गया कि यूसीसी का मसौदा सार्वजनिक होने पर समिति इसका अध्ययन करेगी और फिर सिखों की मांगों और आपत्तियों को पेश करेगी।
इसमें कहा गया कि इसके बाद डीएसजीएमसी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल कानून मंत्री से मुलाकात करेगा और उन्हें इस मुद्दे पर सिख समुदाय की आम राय से अवगत कराएगा।
कालका ने कहा कि समागम में पूर्व न्यायाधीशों और 13 राज्यों के नौकरशाहों सहित सिख समुदाय के लोगों ने भाग लिया।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)










QuickLY