नयी दिल्ली, 21 फरवरी दिल्ली के सनसनीखेज श्रद्धा वालकर हत्या मामले में उसके ‘लिव-इन पार्टनर’ एवं मुख्य आरोपी आफताब अमीन पूनावाला के खिलाफ सुनवाई 24 फरवरी से शुरू होगी क्योंकि यहां की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने मंगलवार को न्यायिक रिकॉर्ड एक सत्र अदालत को भेज दिए।
पूनावाला को अब शुक्रवार को यहां साकेत में एक प्रमुख जिला एवं सत्र न्यायाधीश के समक्ष पेश होना होगा। दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के अनुसार, जघन्य अपराधों से संबंधित किसी मामले को आरोपपत्र दायर होने के बाद संबंधित मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट द्वारा क्षेत्राधिकार वाले न्यायिक सत्र अदालत को भेज दिया जाता है।
दिल्ली पुलिस ने पूनावाला को मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अविरल शुक्ला की अदालत में पेश किया और उसने मौखिम रूप से अनुरोध किया कि उसे भविष्य की सुनवायी के दौरान धार्मिक पुस्तक, कलम और एक नोटपैड रखने की अनुमति दी जाए। इसके बाद मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अविरल शुक्ला ने पूनावाला से कहा कि वह सत्र अदालत के समक्ष एक नयी अर्जी दायर करे।
दिल्ली पुलिस ने 24 जनवरी को पूनावाला के खिलाफ जांच और सबूतों और गवाहों की सूची का विवरण देते हुए 6,629 पन्नों का आरोपपत्र दायर किया था जिसने कथित तौर पर अपने लिव-इन पार्टनर वालकर का गला घोंट दिया था और उसके शव के टुकड़े कर दिए थे।
मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अविरल शुक्ला ने कहा कि आरोप पत्र भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 201 (अपराध के साक्ष्य का विलोपन, या अपराधी को प्रतिच्छादित करने के लिए मिथ्या जानकारी देना) के तहत दायर किया गया था।
मजिस्ट्रेट ने आरोपपत्र का संज्ञान लिया जो कि सीआरपीसी के तहत अनिवार्य है। मजिस्ट्रेट ने कहा कि जांच रिपोर्ट भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 201 के तहत दायर की गई थी।
मजिस्ट्रेट ने कहा, ‘‘दस्तावेजों की जांच पूरी हो गई है... भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत मामले विशेष रूप से एक सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय हैं। तदनुसार, आरोपी को 24 फरवरी को अपराह्न दो बजे प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के समक्ष पेश किया जाए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मामला अब सत्र न्यायालय के सुपुर्द है।’’
सुनवायी के दौरान, मजिस्ट्रेट ने पूनावाला से पूछा कि क्या उसे आरोप पत्र की भौतिक प्रति दी गई है और क्या पृष्ठ पढ़े जाने योग्य हैं। इस पर उसने ‘‘हां’’ में जवाब दिया। इसके बाद उसने अनुरोध किया कि उसे आगे की सुनवायी के दौरान धार्मिक पुस्तक के अलावा कानून की पुस्तकें, एक कलम, नोटपैड रखने की अनुमति दी जाए ताकि वह नोट बना सके और अपने अधिवक्ता एम एस खान की सहायता कर सके।
पूनावाला की ओर से पेश अधिवक्ता एम एस खान ने अदालत को सूचित किया कि इस अदालत में पहले से ही दो आवेदन दायर किए गए हैं, एक आरोपी के शैक्षणिक प्रमाणपत्र के लिए और नोटपैड, पेंसिल जैसे स्टेशनरी चीजों के लिए और दूसरा आरोपपत्र की उचित ‘‘सॉफ्ट कॉपी’’ के लिए।
खान ने यह भी कहा कि मामले से संबंधित जो फुटेज पेन ड्राइव में उन्हें उपलब्ध कराये गए थे, वह अनुक्रम में नहीं थे। उन्होंने कहा, ‘‘जिस फुटेज में श्रद्धा वालकर प्रैक्टो ऐप पर बात करती दिख रही है, वह 10-12 सेकंड की अवधि के छोटे हिस्सों में है। वे किसी श्रृंखला या क्रम में नहीं हैं।’’
जांच अधिकारी ने जवाब दिया कि खान को प्रदान की गई आरोपपत्र की सॉफ्ट कॉपी को विभिन्न फ़ोल्डर में विभाजित किया गया था और इसमें विभिन्न फुटेज जैसे कि प्रैक्टो ऐप से, अपराध स्थल की तस्वीरें और जांच के दौरान की गई बरामदगी की तस्वीरें भी शामिल थीं। उन्होंने कहा कि जांच से जुड़ी हर चीज खान को पहले ही मुहैया करा दी गई थी, जैसे पुलिस को मिली थी।
खान ने इसे लेकर सहमति जतायी कि उन्हें प्रदान की गई पेन ड्राइव में दो हिस्से हैं- आरोपपत्र फोल्डर और प्राथमिकी फोल्डर।
मजिस्ट्रेट ने कहा, ‘‘जो कुछ भी उपलब्ध है, हम मुहैया कराएंगे। विचार आरोपपत्र आरोपी को प्रदान करने का है।’’ उन्होंने खान को पूनावाला के साथ "समन्वय" करने के लिए भी कहा।
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