अहमदाबाद, 27 जून सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी आर बी श्रीकुमार पूछताछ के दौरान अधिकतर समय चुप्पी साधे रहे और उन्होंने गुजरात में 2002 के दंगों के सिलसिले में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार सबूत गढ़ने में अपनी कथित भूमिका के बारे में कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। पुलिस ने यह जानकारी दी।
सीतलवाड़ ने मामले को देख रहे गुजरात पुलिस के विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा उनसे पूछे गये सवालों का जवाब देने के लिए समय मांगा है, वहीं श्रीकुमार ने जांच अधिकारियों से कहा कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने यह जानकारी दी।
जांच में एसआईटी की मदद कर रहे अधिकारी ने कहा, ‘‘दोनों पूछताछ के दौरान ज्यादा कुछ नहीं बता रहे। सीतलवाड़ से जब कल पूछताछ की गयी थी तो उन्होंने केवल इतना कहा था कि उन्हें सवालों का जवाब देने के लिए और वक्त चाहिए। वह यह भी कहती रहीं कि वह जो भी कहना चाहेंगी, अदालत के सामने ही कहेंगी।’’
अधिकारी के अनुसार, ‘‘हमने आज चार घंटे तक श्रीकुमार से पूछताछ की। लेकिन वह कहते रहे कि उन्होंने जो किया, कानून के अनुसार किया और कुछ गलत नहीं किया। हमारा मामला व्यापक रूप से दस्तावेजी साक्ष्यों पर आधारित है, इसलिए आरोपी सहयोग न भी करें तो भी जांच प्रभावित नहीं होगी।’’
अहमदाबाद की एक अदालत ने रविवार को सीतलवाड़ तथा राज्य के पूर्व डीजीपी श्रीकुमार को 2002 के गुजरात दंगों के सिलसिले में बेगुनाह लोगों को फंसाने के लिए कथित रूप से सबूत तैयार करने के मामले में दो जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेजा।
गुजरात पुलिस ने मामले की जांच के लिए एक एसआईटी बनाई है जिसके प्रमुख पुलिस उप महानिरीक्षक (आतंकवाद निरोधक दस्ता) दीपन भद्रन हैं।
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