नयी दिल्ली, 27 जुलाई कोरोना वायरस से सबसे अधिक खतरे का सामना कर रहे अधिक उम्र के लोगों, अन्य जटिल बीमारियों से जूझ रहे मरीजों और चिकित्सा कर्मियों में संक्रमण और उसके दुष्प्रभाव को कम करने में बीसजी टीका वीपीएम1002 के प्रभाव को परखने के लिए सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया तीसरे चरण का क्लीनिकल परीक्षण कर रहा है।
यह जानकारी जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीपीटी) ने एक बयान में दी।
बयान के मुताबिक करीब छह हजार स्वास्थ्य कर्मी और अधिक खतरे का सामना कर रहे लोगों ने क्लीनिकल परीक्षण के लिए अपना पंजीकरण कराया है जिनमें वे लोग भी शामिल हैं जो कोविड-19 मरीजों के संपर्क में आए थे। इस परीक्षण में यह पता लगाया जाएगा कि क्या कोरोना वायरस के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में बैकिलस-कालमेट्टे-गुयिरिन- (आरबीसीजी) कारगर है या नहीं।
उल्लेखनीय है कि क्षय रोग से बचाने के लिए सभी नवजात शिशुओं को राष्ट्रीय बाल टीकाकरण कार्यक्रम के तहत बीसीजी का टीका दिया जाता है। क्षय रोग बैक्टीरिया से होता है और इससे सबसे अधिक फेफड़े प्रभावित होते हैं।
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डीपीटी ने बयान में कहा, ‘‘सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (एसआईआईपीएल) जैव प्रौद्योगिकी विभाग के राष्ट्रीय बायोफर्मा मिशन के तहत विभिन्न स्थानों पर बीसीजी टीके के उम्मीदवार वीपीएम1002 के तीसरे चरण का क्लीनिकल परीक्षण नियंत्रित आधार पर कर रहा है।’’
विभाग ने कहा, ‘‘ इस परीक्षण का उद्देश्य सबसे अधिक खतरों वाले व्यक्तियों जैसे बजुर्गों, गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों और कोरोना वायरस के संपर्क में आने वाले चिकित्सा कर्मियों में कोविड-19 के संक्रमण और उसके प्रभाव को कम करने में वीपीएम1002 की क्षमता का आकलन करना है।’’
डीपीटी की सचिव और बीआईआरएससी की अध्यक्ष रेणु स्वरूप ने कहा कि बीजीसी प्रमाणित टीका है और क्षय रोग के अलावा अन्य बीमारियों के इलाज में इसका मूल्यांकन एक व्यावहारिक दृष्टिकोण है।
उन्होंने बताया, ‘‘ परीक्षण मई 2020 में शुरू हुआ और देशभर के 40 अस्पतालों में करीब छह हजार लोगों ने पंजीकृत कराया है। यह बीमारी को रोकने की दिशा में मील का पत्थर का साबित होग और हम इस महत्वपर्णू परीक्षण में नतीजों को देख रहे हैं।’’
डीबीटी में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के मालिक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अदर पूनावाला को उद्धृत किया, ‘‘ हम इस अध्ययन के लिए डीबीटी-बीआईआरएसी के साथ साझेदारी करके खुश हैं और परीक्षण के सकारात्मक परिणामों की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो इस साल के समापन से पहले उपलब्ध होना चाहिए।’’
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