देश की खबरें | तबलीगी सदस्यों को काली सूची में डालने और वीजा रद्द करने के लिेये अलग अलग आदेश दिये : केंद्र

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केन्द्र ने बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि तबलीगी जमात की गतिविधियों में कथित रूप से संलिप्तता के कारण 2,765 विदेशी नागरिकों को काली सूची में रखने और उनके वीजा रद्द करने के प्रत्येक मामले में अलग अलग आदेश पारित किये गये हैं।

नयी दिल्ली, दो जुलाई केन्द्र ने बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि तबलीगी जमात की गतिविधियों में कथित रूप से संलिप्तता के कारण 2,765 विदेशी नागरिकों को काली सूची में रखने और उनके वीजा रद्द करने के प्रत्येक मामले में अलग अलग आदेश पारित किये गये हैं।

केन्द्र ने अपने हलफनामे में न्यायालय को सूचित किया कि उपलब्ध सूचना के अनुसार 11 राज्यों ने तबलीगी जमात के विदेशी सदस्यों के खिलाफ 205 प्राथमिकी दर्ज की हैं और अभी तक 2,765 विदेशियों को काली सूची में शामिल किया गया है। इनमे से 2,679 विदेशियों के वीजा रद्द किये गये हैं। इनमें नौ समुद्रपारीय भारत के नागरिक कार्ड धारक शामिल हैं। हलफनामे में कहा गया कि शेष 86 में नेपाल के नागरिक शामिल हैं जिन्हें वीजा की जरूरत नहीं होती है।

यह भी पढ़े | Coronavirus: अमित शाह ने दिल्ली-एनसीआर में कोविड-19 पर रोक लगाने के लिए की अहम बैठक, सीएम अरविंद केजरीवाल समेत ये नेता हुए शामिल.

शीर्ष अदालत में दायर हलफनामे में केन्द्र ने यह भी कहा कि तबलीगी जमात के विदेशी सदस्यों की तलाश में 1,906 लुक आउट सर्कुलर जारी किये गये थे जबकि यह सर्कुलर जारी होने या फिर काली सूची में शामिल किये जाने की कार्यवाही से पहले ही 227 विदेशी भारत से लौट गये थे।

केन्द्र ने कहा कि इन विदेशी नागरिकों को वीजा रद्द करने की जानकारी ई मेल के माध्यम से दी गयी लेकिन कुछ नियमित वीजा धारकों को इसकी सूचना नहीं दी जा सकी क्योंकि उनके ई मेल उपलब्ध नहीं थे।

यह भी पढ़े | ज्योतिरादित्य सिंधिया का तंज, कहा- मुझे दिग्विजय सिंह और कमलनाथ से किसी सर्टिफिकेट की जरूर नहीं : 2 जुलाई 2020 की बड़ी खबरें और मुख्य समाचार LIVE.

न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने वीडियो कांफ्रेन्सिंग के माध्यम से इस मामले की सुनवाई की। पीठ ने केन्द्र की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता और याचिकाकर्ताओं के वकील की दलीलें सुनी और याचिका दायर करने वाले विदेशी नागरिकों को केन्द्र के हलफनामे का जवाब देने का निर्देश दिया।

पीठ ने इसके साथ ही इसकी सुनवाई 10 जुलाई के लिये स्थगित कर दी। पीठ ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वापस भेजे जाने के बारे में वे सक्षम प्राधिकारी के समक्ष उचित आवेदन करें।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘केन्द्र के हलफनामे से यह पता चलता है कि सक्षम विभाग/प्राधिकार ने वीजा रद्द करने और काली सूची में शामिल करने के बारे में अलग अलग आदेश पारित किये हैं। केन्द्र सरकार के अनुसार संबंधित याचिकाकर्ताओं के ठिकानों की जानकारी नहीं होने की वजह से इन आदेशों की तामील नहीं की जा सकी।’’

पीठ ने कहा कि ये याचिका लंबित होना याचिकाकर्ताओं द्वारा उन्हें उनके देश वापस भेजने के लिये सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रतिवेदन देने में बाधक नहीं होगा।

पीठ ने कहा, ‘‘प्राधिकारी इन प्रतिवेदनों पर उसके मेरिट के आधार पर कानून के अनुसार विचार करेंगे।’’

सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि केन्द्र ने एक हलफनामा दाखिल किया है जिसमेे कहा गया है कि वीजा रद्द करने और काली सूची में रखने के बारे में मामले दर मामले के आधार पर आदेश पारित किये गये हैं।

मेहता ने कहा कि वीजा प्रदान करना मौलिक अधिकार तो क्या लागू करने योग्य अधिकार भी नहीं है और इन विदेशी नागरिकों को सिर्फ काली सूची में ही नहीं शामिल किया गया है बल्कि इनके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं और उन पर विदेशी नागरिक कानून के तहत मुकदमे चलाये जायेंगे।

तलबीगी जमात की गतिविधियों में शामिल हुये 35 देशों के इन नागरिकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सी यू सिंह ने कहा कि यदि इन विदेशी नागरिकों ने किसी कानून का उल्लंघन किया था तो उन्हें उनके देश वापस भेजा जा सकता था।

उन्होंने कहा कि केन्द्र का कहना है कि मामले दर मामले के आधार पर आदेश पारित किये गये जबकि करीब 1500 विदेशी नागरिकों के वीजा रद्द करने के बारे में उन्हें एक लाइन का ईमेल भेजा गया था लेकिन 10 साल के लिये भारत यात्रा पर प्रतिबंध लगाने के बारे में उन्हें कोई कारण बताओ नोटिस नहीं दिया गया।

इस पर पीठ ने सिंह से कहा कि वे केन्द्र के प्रत्येक आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दे सकते हैं क्योंकि अदालत को ही यह देखना होगा कि आदेश तर्कसंगत तरीके से पारित किये गये हैं या इन्हें यांत्रिक तरीके से पास किया गया है।

पीठ ने कहा कि इन नागरिकों को उनके देश वापस भेजने का सवाल तो उस समय उठेगा जब उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं होगा।

पीठ ने केन्द्र से कहा कि वीजा रद्द करने के बारे में पारित आदेश को न्यायालय में दाखिल किया जाये और इसे याचिकाकर्ताओं के वकीलों को भी दिया जाये।

न्यायालय ने 29 जून को सरकार के दो अप्रैल और चार जून के आदेश के खिलाफ थाईलैंड की सात माह की गर्भवती नागरिक सहित 34 विदेशी नागरिकों की याचिकाओं पर गृह मंत्रालय को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया था।

अनूप

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

संबंधित खबरें

T20 World Cup 2026 Semi Final Schedule: वेस्टइंडीज को हराकर सेमीफाइनल में भारत, 5 मार्च को वानखेड़े में इंग्लैंड से भिड़ंत; यहां देखें पूरा शेड्यूल

India vs West Indies, 52nd Match Scorecard: रोमांचक मुकाबले में वेस्टइंडीज ने टीम इंडिया को 5 विकेट से हराकर सेमीफाइनल में बनाई जगह, संजू सैमसन ने खेली धमाकेदार पारी; यहां देखें IND बनाम WI मैच का स्कोरकार्ड

Australia Women vs India Women, 3rd ODI Match Video Highlights: होबार्ट में ऑस्ट्रेलिया ने टीम इंडिया को 185 रनों से रौंदा, सीरीज में 3-0 से किया क्लीन स्वीप; यहां देखें AUS W बनाम IND W मैच का वीडियो हाइलाइट्स

India vs West Indies, 52nd Match Scorecard: कोलकाता में वेस्टइंडीज ने टीम इंडिया के सामने रखा 196 रनों का टारगेट, रोवमैन पॉवेल और जेसन होल्डर ने खेली धमाकेदार पारी; यहां देखें पहली पारी का स्कोरकार्ड

\