नयी दिल्ली, एक अप्रैल सेना के शीर्ष नेतृत्व ने सोमवार को यहां एक सम्मेलन के दौरान अपने शीर्ष कमांडरों की उपस्थिति में पड़ोसी देशों से जुड़ी भू-राजनीतिक और ‘‘सुरक्षा चुनौतियों’’ पर गहन मंथन किया। सूत्रों ने यह जानकारी दी।
सैन्य कमांडरों के सम्मेलन के हिस्से के रूप में इस साल पहली बार दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में शीर्ष अधिकारियों ने विभिन्न सुरक्षा चुनौतियों पर मंथन किया।
रक्षा से जुड़े सूत्रों ने बताया कि सेना प्रमुख, सेना उप प्रमुख और सभी सैन्य कमांडरों ने सोमवार को विचार-विमर्श सत्र में हिस्सा लिया।
सैन्य कमांडर सम्मेलन का आयोजन ‘हाइब्रिड’ तरीके (ऑनलाइन और ऑफलाइन) में किया जा रहा है। 28 मार्च को डिजिटल माध्यम से और एक-दो अप्रैल को आमने-सामने की बैठक आयोजित की गई।
सैन्य प्रतिष्ठान के सूत्रों ने बताया कि सम्मेलन के दौरान ‘‘ पड़ोसी देश से जुड़ी भू-राजनीतिक और सुरक्षा चुनौतियों’’ पर गहन मंथन किया गया।
रक्षा मंत्रालय ने 27 मार्च को एक बयान में कहा था कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मंगलवार को इस सम्मेलन को संबोधित करेंगे इस दौरान सैन्य के वरिष्ठ नेतृत्व समग्र सुरक्षा स्थिति का भी आकलन करेगा।
इसमें कहा गया था कि यह सम्मेलन भारतीय सेना के शीर्ष नेतृत्व के लिए वैचारिक मुद्दों पर विचार-मंथन करने, समीक्षा करने और सुरक्षा की समग्र स्थिति का आकलन करने के एक महत्वपूर्ण मंच का कार्य करता है।
अधिकारियों ने कहा था कि यह भविष्य का रुख तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णयों को सुगम बनाने वाली प्रमुख प्राथमिकताओं को निर्धारित करेगा।
सेना का शीर्ष नेतृत्व एक अप्रैल को आमने-सामने बैठकर इस सम्मेलन के दौरान गहन विचार-विमर्श सत्र में हिस्सा लेगा।
बयान में कहा गया कि सत्रों का उद्देश्य परिचालन प्रभावशीलता को बढ़ाना, नवाचार और अनुकूलनशीलता की संस्कृति को बढ़ावा देने के महत्व और भविष्य की चुनौतियों से निपटने की तैयारी सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षण और विकास कार्यक्रमों में निवेश करना होगा।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY