जरुरी जानकारी | कामकाज में खामी के दोषी पाये जाने वाले बोर्ड सदस्यों, अधिकारियों को ‘ब्लैकलिस्ट’ करे सेबी: मूर्ति

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नयी दिल्ली, 21 सितंबर इन्फोसिस के सह-संस्थापक एन आर नारायण मूर्ति ने सोमवार को कहा कि भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) को कार्य संचालन में खामी के दोषी पाये जाने वाले निदेशक मंडल के सदस्यों और अधिकारियों को ‘काली सूची’ में डाल देना चाहिए।

मूर्ति ने सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कंपनियों को सुझाव दिया है कि वे किसी समस्या की पहचान करने और उसका समाधान के लिए आगे बढ़कर काम करें। इससे उनकी उत्पादकता बढ़ेगी।

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मूर्ति ने सोमवार को कॉरपोरेट गवर्नेंस पर अखिल भारतीय प्रबंधन संघ (एआईएमए) के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि ‘भंडाफोड़ वाली’ शिकायत पर हुई जांच का पूरा ब्योरा शेयरधारकों को उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक कि इसमें ऐसी कोई सूचना नहीं हो, जिससे प्रतिद्वंद्वियों को फायदा पहुंचता हो तब तक इसका पूरा ब्यौरा शेयरधारकों की पहुंच के दायरे में होना चाहिये।

उन्होंने कहा कि किसी कंपनी में चल रही गड़बडी के बारे में जानकारी देकर सतर्क करने वाले ‘व्हिसलब्लोअर’ की शिकायत के बाद जांच में यदि यह पता चलता है कि कंपनी के निदेशक मंडल और अधिकारियों ने अपने जिम्मेदारियों को ठीक तरीके से नहीं निभाया और कुछ ‘लाभ’ लेकर संचालन में गड़बड़ी में योगदान दिया है, तो उन्हें तुरंत इस्तीफा देने को कहा जाना चाहिए।

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मूर्ति ने कहा, ‘सेबी को ऐसे बोर्ड सदस्यों और अधिकारियों को ‘काली सूची’ में डालना चाहिए और शेयरधारकों को उन्हें बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा शेयरधारकों को इन बोर्ड सदस्यों और अधिकारियों से घटना की तारीख से लेकर जांच पूरी होने तक के समय के 100 प्रतिशत भुगतान या शुल्क को वापस वसूलना चाहिए।

इसके साथ ही मूर्ति ने यह भी कहा कि किसी पूर्व कर्मचारी को सिर्फ बदला लेने की भावना से ‘व्हिसलब्लोअर’ का काम नहीं करना चाहिए। उनके द्वारा दी गई शिकायतों तथ्यों और आंकड़ों के साथ होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि किसी भी कंपनी को व्हिसलब्लोअर को पूरा संरक्षण उपलब्ध कराना चाहिए। उनके द्वारा की गई शिकातयों को पारदर्शी और भरोसेमंद तरीके से निपटाया जाना चाहिए।

मूर्ति ने कहा कि यदि शिकायत किसी मध्यम या निचले स्तर के कर्मचारी के खिलाफ है, ऐेसे में वरिष्ठ कर्मचारियों की आंतरिक समिति द्वारा पारदर्शी तरीके तथा बिना किसी पक्षपात के साथ जांच पर्याप्त है। समिति में ऐसा कोई कर्मचारी नहीं होना चाहिए जिसका उस कर्मचारी से संबंध है।

उन्होंने कहा कि यदि शिकायत कंपनी के चेयरमैन, बोर्ड के सदस्यों या सीईओ के खिलाफ है, तो भारत में बोर्ड इस तरह की शिकायतों की जांच खुद करता है और किसी बाहरी विधि कंपनी की सेवाएं लेता है। मूर्ति ने कहा कि यह अच्छा विचार नहीं है। वैश्विक स्तर पर ऐसे मामलों में बोर्ड खुद को जांच से अलग कर लेते हैं।

इसके साथ ही मूर्ति ने कहा कि भारतीय आईटी कंपनियों को किसी समस्या की अग्रसारी तरीके से पहचान और समाधान की सोच के साथ काम करना चाहिए। इससे उनका प्रति व्यक्ति उत्पादकता राजस्व बढ़ेगा।

उन्होंने कहा कि भारतीय आईटी कंपनियो की वृद्धि 7 से 10 प्रतिशत के बीच बनी रहेगी। उनका परिचालन मार्जिन 15 से 20 प्रतिशत के बीच रहेगा।

अजय

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