नयी दिल्ली, पांच जून बाजार नियामक सेबी ने बुधवार को ग्राहकों के खाते में प्रतिभूतियों के सीधे भुगतान की प्रक्रिया को अनिवार्य बनाने का निर्णय लिया। परिचालन दक्षता बढ़ाने और ग्राहकों की प्रतिभूतियों के जोखिम को कम करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एक परिपत्र में कहा कि यह 14 अक्टूबर से प्रभावी होगा।
वर्तमान में, समाशोधन निगम प्रतिभूतियों के भुगतान को ब्रोकर के खाते में जमा करता है। उसके बाद इसे संबंधित ग्राहक के डीमैट खातों में जमा किया जाता है।
सेबी ने शेयर बाजारों, समाशोधन निगम और डिपॉजिटरी के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद फैसला किया है, ‘‘भुगतान के लिए प्रतिभूतियां समाशोधन निगम सीधे संबंधित ग्राहक के डीमैट खाते में जमा करेगा।’’
इसके अलावा, समाशोधन निगमों को मार्जिन ट्रेडिंग सुविधा के तहत बिना भुगतान वाली प्रतिभूतियों और वित्तपोषित शेयरों की पहचान करने के लिए कारोबारी सदस्य या समाशोधन सदस्यों (सीएम) के लिए एक व्यवस्था प्रदान करनी चाहिए।
सेबी ने सुझाव दिया है कि ‘पोजिशन’ के स्तर पर अगर कोई कमी रहती है तो कारोबारी सदस्य या समाशोधन सदस्यों को नीलामी की प्रक्रिया के माध्यम से इसका निपटान करना चाहिए।
इसके अलावा, ऐसे मामलों में ब्रोकर को समाशोधन निगम की तरफ से लगाए गए शुल्क के अलावा ग्राहक पर कोई शुल्क नहीं लगाना चाहिए।
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