नयी दिल्ली, 28 अप्रैल सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के एक प्रस्ताव की निंदा करते हुए उसे ‘अत्यंत अनुचित’ कहा, जिसमें कहा गया है कि शीर्ष अदालत को समलैंगिक विवाह को वैध बनाने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई छोड़ देनी चाहिए।
बीसीआई ने 23 अप्रैल को पारित एक प्रस्ताव में उच्चतम न्यायालय में समलैंगिक विवाह के मुद्दे पर हो रही सुनवाई पर अपनी चिंता प्रकट की और कहा कि अदालत द्वारा विवाह की अवधारणा जैसी मौलिक चीज में बदलाव करना ‘विनाशकारी’ होगा और इस मामले को विधायिका पर छोड़ देना चाहिए।
एससीबीए के अनेक सदस्यों के हस्ताक्षर वाले उसके बयान में कहा गया कि यह तय करने की जिम्मेदारी अदालत की है कि मुद्दे पर फैसला अदालत को सुनाना चाहिए या इसे संसद पर छोड़ देना चाहिए।
उसने कहा, ‘‘एससीबीए की कार्यसमिति को लगता है कि बीसीआई के लिए 23 अप्रैल, 2023 को प्रेस वक्तव्य जारी कर उच्चतम न्यायालय के समक्ष मामले में सुनवाई का विरोध करना अत्यंत अनुचित है।’’
प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति एस के कौल, न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट्ट, न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पांच सदस्यीय संविधान पीठ उन याचिकाओं पर दलीलें सुन रही है, जिनमें समलैंगिक विवाह को वैधता प्रदान करने का अनुरोध किया गया है।
बीसीआई ने एक प्रस्ताव में कहा था कि इस तरह के संवेदनशील मामले में शीर्ष अदालत का कोई भी फैसला भावी पीढ़ियों के लिए बहुत नुकसानदेह हो सकता है।
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