देश की खबरें | बीमा के लिए गर्भाशय निकालने की सर्जरी के आरोप वाली याचिका पर न्यायालय ने केंद्र से जवाब मांगा

नयी दिल्ली, 20 फरवरी उच्चतम न्यायालय ने केंद्र से सोमवार को उस जनहित याचिका पर जवाब देने को कहा जिसमें आरोप लगाया गया है कि बिहार, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के डॉक्टर गरीब महिलाओं के गर्भाशय को निकालने की सर्जरी (हिस्टेरेक्टोमी) अनावश्यक तरीके से कर रहे हैं ताकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत सरकार से बीमा शुल्क वसूल सकें।

प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने चिकित्सक नरेंद्र गुप्ता की जनहित याचिका के निस्तारण के लिए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी की मदद मांगी।

पीठ में न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला शामिल थे। पीठ ने केंद्र को जनहित याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया।

हिस्टेरेक्टोमी एक सर्जरी है जिसमें महिला का गर्भाशय निकाल दिया जाता है और इसके बाद वह गर्भ धारण नहीं कर सकती और उसे मासिक धर्म भी नहीं आता, चाहे उसकी आयु कितनी भी हो।

खबरों पर आधारित जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि बिहार, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में डॉक्टरों द्वारा अनावश्यक तरीके से गर्भाशय को निकालने की सर्जरी किये जाने की प्रवृत्ति सामने आई है ताकि सरकारों से बीमा की राशि वसूली जा सके।

जनहित याचिका में पीड़ित महिलाओं के लिए मुआवजे की तथा समस्या से निपटने के लिए सार्थक नीतिगत बदलावों की मांग की गयी है।

केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय ने गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को स्वास्थ्य बीमा कवरेज प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू की थी।

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