देश की खबरें | केएफओएन परियोजना की सीबीआई जांच से जुड़ी सतीशन की याचिका खारिज

कोच्चि, 13 सितंबर केरल उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष वी डी सतीशन की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें ‘केरल फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क’ (केएफओएन) परियोजना के लिए दिये गए ठेकों को निरस्त करने और इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने का अनुरोध किया गया है।

न्यायमूर्ति ए के जयशंकरन नांबियार और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी एम ने कहा कि अदालत के समक्ष मौजूद सामग्री उन्हें केरल फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क (केएफओएन) परियोजना के कार्यान्वयन में किसी भी अवैधता या अनियमितता के संबंध में प्रथम दृष्टया निर्णय लेने के लिए उन्हें प्रेरित नहीं करती।

अदालत ने कहा कि इसके विपरीत, प्रतिवादियों (राज्य सरकार) की ओर से महाधिवक्ता द्वारा पेश किए गए स्पष्टीकरण पर विचार करने के बाद प्रथम दृष्टया जो दृश्य उभरता है, वह यह है कि केएफओएन परियोजना अपने घोषित उद्देश्यों की प्राप्ति की दिशा में अच्छी तरह से आगे बढ़ती हुई प्रतीत होती है। .

पीठ ने कहा, ‘‘ऐसा इसलिए है क्योंकि हमें बताया गया है कि अब तक परियोजना के तहत पहले से ही बिछाए गए ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के माध्यम से 20,336 सरकारी कार्यालयों को ‘कनेक्टिविटी’ प्रदान की गई है और 5,484 आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों को मुफ्त इंटरनेट प्रदान किया गया है।’’

अदालत ने कहा कि परियोजना के संबंध में सरकार और उसके विभागों द्वारा लिए गए निर्णयों में हस्तक्षेप करने या उन्हें इसे लागू करने से रोकने का कोई कारण नहीं है।

पीठ ने कहा,‘‘हम इस स्तर पर याचिकाकर्ता (सतीशन) द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच सीबीआई को सौंपना जरूरी नहीं समझते हैं।’’

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) और रेलटेल सहित सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों का एक संघ इस परियोजना को क्रियान्वित कर रहा है जिसमें कुछ निजी कंपनियां भी शामिल हैं। उन्हें यह ठेका 2019 में दिया गया था।

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