हरिद्वार (उत्तराखंड), 15 अक्टूबर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने संतों से शंकराचार्य के रूप में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के पट्टाभिषेक में हिस्सा नहीं लेने की अपील करते हुए शनिवार को कहा कि इस तरह का कृत्य अदालत की अवमानना होगी।
दरअसल, उच्चतम न्यायालय ने उत्तराखंड में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य के रूप में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के पट्टाभिषेक पर रोक लगा दी है।
दिवंगत स्वामी स्वरूपानंद के उत्तराधिकारी के रूप में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पट्टाभिषेक 17 अक्टूबर को जोशीमठ में होना है।
महंत रवींद्र पुरी निरंजनी अखाड़े के सचिव भी हैं। उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की शंकराचार्य के रूप में नियुक्ति का विरोध करते हुए कहा कि उनकी नियुक्ति में उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि संन्यासी अखाड़ों की सहमति के बिना दफनाने से पहले ही उन्हें दिवंगत शंकराचार्य के उत्तराधिकारी के रूप में नियुक्त करना गलत था।
उन्होंने कहा कि पट्टाभिषेक समारोह में भाग लेना अदालत की अवमानना होगी।
हालांकि, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्य स्वामी मुकुंदानंद ने ‘पीटीआई-’ को बताया कि पट्टाभिषेक पहले ही हो चुका है और 17 अक्टूबर को जोशीमठ में होने वाला कार्यक्रम केवल संत को सम्मानित करने के लिए है।
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