नयी दिल्ली, 15 अगस्त केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने मंगलवार को कहा कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए एक रोडमैप आवश्यक है। इसके साथ ही उन्होंने कानून के शासन को लोकतंत्र की नींव करार दिया।
मेघवाल 77वें स्वतंत्रता दिवस पर उच्चतम न्यायालय परिसर में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
इस अवसर पर प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि भारतीय न्यायपालिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती न्याय तक पहुंच के मार्ग में आने वाली बाधाओं को खत्म करना तथा अदालतों को सुलभ और समावेशी बनाने के लिए प्राथमिकता के आधार पर बुनियादी ढांचे में सुधार की आवश्यकता है।
प्रधान न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने सर्वोच्च अदालत के लॉन में राष्ट्रीय ध्वज फहराया।
मेघवाल ने अपने संक्षिप्त संबोधन में कहा कि आजादी के 75वें वर्ष को "आजादी का अमृत महोत्सव" के रूप में मनाया गया और इसने देश की अब तक की यात्रा का विश्लेषण करने एवं यह पता लगाने का अवसर भी प्रदान किया कि क्या भारत अपने गंतव्य तक पहुंच पाया है।
उन्होंने कहा, "पिछले 75 साल कैसे रहे, हम कहां तक पहुंचे, अपनी मंजिल तक पहुंच पाए या नहीं... इन सबका विश्लेषण करने का यह अवसर है। लेकिन 2047 तक हम कहां पहुंचेंगे, इसके लिए प्रधानमंत्री ने आज लाल किले की प्राचीर से गंतव्य की घोषणा कर दी है।"
मेघवाल ने कहा कि किसी भी देश को विकसित बनाने के लिए एक रोडमैप आवश्यक है। उन्होंने कहा, "हमें एक रोडमैप बनाना होगा... भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की प्रक्रिया में हर किसी को एक साथ आगे बढ़ना होगा।"
उन्होंने कहा कि विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र, संप्रभुता, ध्वज, मुद्रा और की पांच अनिवार्यताओं के बिना किसी राष्ट्र का अस्तित्व नहीं हो सकता।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY