जरुरी जानकारी | आर्थिक वृद्धि दर कम होने पर देश में आय,जीवन गुणवत्ता पर लम्बे असर का जोखिम’

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. कोविड-19 संकट के बाद देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आठ से साढ़े आठ प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि होने की जरूरत है। यदि ऐसा नहीं होता है तो लोगों की आय और गुणवत्ता पूर्ण जीवन स्तर में दशक भर के लिए स्थिरता आने का जोखिम है। इससे निपटने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने की जरूरत है।

मुंबई, 26 अगस्त कोविड-19 संकट के बाद देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आठ से साढ़े आठ प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि होने की जरूरत है। यदि ऐसा नहीं होता है तो लोगों की आय और गुणवत्ता पूर्ण जीवन स्तर में दशक भर के लिए स्थिरता आने का जोखिम है। इससे निपटने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने की जरूरत है।

मैकेंजी ग्लोबल इंस्टीट्यूट की रपट के मुताबिक देश को अगले 12 से 18 महीने में उत्पादकता और रोजगार बढ़ाने को लेकर कई सुधारवादी कदम उठाने होंगे।

यह भी पढ़े | JEE And NEET Exams Guidelines: जेईई मेन (JEE Main) और नीट (NEET) परीक्षा से पहले NAT ने जारी की गाइडलाइन, छात्रों को करना होगा इन नियमों का पालन.

रपट में कहा गया है कि बढ़ती आबादी और शहरीकरण रुख को देखें तो 2030 तक नौ करोड़ अतिरिक्त लोगों को कृषि से इतर रोजगार की तलाश होगी। वर्ष 2013-18 के बीच भारत ने प्रतिवर्ष 40 लाख गैर-कृषि रोजगार पैदा करने में सफलता प्राप्त की है। उसे यह रफ्तार तीन गुना बढ़ाकर प्रतिवर्ष 1.2 करोड़ गैर-कृषि रोजगार करना होगा।

विभिन्न रेटिंग एजेंसियों और वैश्विक वित्त विश्लेषक कंपनियों ने 2020-21 में देश की अर्थव्यवथा में पांच प्रतिशत से अधिक संकुचन का अनुमान जताया है।

यह भी पढ़े | 7th Pay Commission: इस सरकारी पेंशन स्कीम में आप भी कर सकते है निवेश, बुढ़ापे में नहीं होगी पैसे की किल्लत.

मैकेंजी ग्लोबल की रपट के मुताबिक इसके अगले दशक में आठ से साढ़े आठ प्रतिशत वार्षिक की दर से वृद्धि करने की जरूरत है, ताकि अवसर पैदा किए जा सकें। रपट में चेतावनी दी गयी है कि इसमें असफल रहने पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

मैकेंजी ने चेतावनी दी, ‘‘ वृद्धि को बढ़ाने वाले तत्काल उपायों के अभाव में भारत में लोगों के आय और गुणवत्तापूर्ण जीवन स्तर को लेकर दशक भर का जोखिम है।’’

सुधारवादी कदमों के बारे में रपट में विनिर्माण, रियल एस्टेट, कृषि, स्वास्थ्य और खुदरा क्षेत्र पर विशेष ध्यान देने के लिए कहा गया है। साथ ही भू-क्षेत्र को खोलने, लचीली श्रम प्रणाली बनाने और प्रभावी बिजली वितरण प्रणाली स्थापित करने का भी सुझाव दिया गया है।

रपट में कहा गया है कि भूक्षेत्र को खोलने से लागत में चौथाई प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। वहीं प्रभावी बिजली वितरण प्रणाली से ग्राहकों पर बिजली बिल का बोझ 20 प्रतिशत तक कम होगा।

रपट में 30 शीर्ष सरकारी कंपनियों के निजीकरण की भी वकालत की गयी है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\