जरुरी जानकारी | रिजर्व बैंक ने प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को कर्ज देने के लिए ‘सह-उत्पत्ति मॉडल’ का बढ़ाया दायरा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. भारतीय रिजर्व बैंक ने ‘सह-उत्पत्ति’ मॉडल का दायरा शुक्रवार को बढ़ा दिया। इसके चलते अब आवास वित्त कंपनियों समेत सभी गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियां (एनबीएफसी) प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को ऋण देने के लिए बैंकों के साथ गठजोड़ कर सकेंगी।

मुंबई, नौ अक्टूबर भारतीय रिजर्व बैंक ने ‘सह-उत्पत्ति’ मॉडल का दायरा शुक्रवार को बढ़ा दिया। इसके चलते अब आवास वित्त कंपनियों समेत सभी गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियां (एनबीएफसी) प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को ऋण देने के लिए बैंकों के साथ गठजोड़ कर सकेंगी।

रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि नए ‘सह-उत्पत्ति’ मॉडल अर्थव्यवस्था के उन क्षेत्रों को कर्ज मिलने में सुविधा होगी जिन्हें कर्ज नहीं मिल पाता है अथवा उनकी जरूरतों को पूरी तरह से पूरा नहीं किया जाता है।

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वर्ष 2018 में रिजर्व बैंक ने बैंकों द्वारा ऋण के ‘सह-उत्पत्ति’ मॉडल की रुपरेखा को सामने रखा था। इसके लिए कुछ विशेष तरह की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को ही बैंकों के साथ साझेदारी कर प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को कर्ज देने के लिए सशर्त साझेदारी करने की अनुमति दी गयी थी।

दास ने कहा कि नयी व्यवस्था एनबीएफसी और बैंकों को कर्ज के लिए संयुक्त योगदान देने का प्रावधान करेगी। इतना ही नहीं कर्ज से जुड़े जोखिम और लाभ भी दोनों के बीच साझा किए जाएंगे।

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गवर्नर ने कहा, ‘‘ इस योजना का विस्तार सभी एनबीएफसी (आवास वित्त कंपनियों समेत) तक करने का निर्णय किया गया है। ताकि सभी प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए ऋण की उपब्धता हो सके। साथ ही कर्ज देने वाले संस्थानों को कामकाज करने के लिए लचीलापन मिल सके।’’

उन्होंने कहा कि सभी आवास वित्त कंपनियां भी बैंकों के साथ साझेदारी कर सकेंगी।

दास ने कहा कि नयी व्यवस्था के तहत आउटसोर्सिंग से जुड़े नियामकीय प्रावधान, अपने ग्राहक को जानो (केवाईसी) नियम की कर्ज देने वाले संस्थानों को भी करनी होगी।

उन्होंने कहा कि ‘सह-उत्पत्ति’ मॉडल के लिए संशोधित दिशानिर्देश माह के अंत तक जारी कर दिए जाएंगे।

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