जरुरी जानकारी | ऋण चूक पर दिवाला संहिता की कार्रवाई स्थगित करने से कंपनियों को राहत : विशेषज्ञ

नयी दिल्ली, आठ जून सरकार के कंपनियों को कुछ समय के लिए ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवाला संहिता (आईबीसी) की कार्रवाई से बचाने के निर्णय के बारे में विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कोविड-19 के चलते लगी पाबंदियों से मुश्किल में फंसी कंपनियों को सांस लेने का मौका मिला है।

उनका कहना है कि इस फैसले के बाद कर्ज देने वाले बैंक/वित्तीय संस्थान और कारोबारी उधार देने वाली इकाइयां कर्ज वसूली के लिए आईबीसी की चौहद्दी से बाहर के रास्ते अपना सकती हैं।

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गौरतलब है कि सरकार ने अध्यादेश जारी कर कंपनियों को आईबीसी के तहत कार्रवाई के प्रति एक ढाल दे दिया है। इसके तहत 25 मार्च 2020 या उसके बाद कर्ज की किस्तें चुकाने में हुई चूक के लिए दिवाला संहिता के तहत कार्रवाई नहीं शुरू की जा सकती। यह उपाय छह महीने के लिए किया गया है। इसे एक साल तक बढ़ाया जा सकता है। सरकार ने कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए 25 मार्च को ही लॉकडाउन (आवागमन पर सार्वजनिक पाबंदी) किया था।

इसका अध्यादेश का मकसद कोरोना महामारी से उत्पन्न अभूतपूर्व संकट के कारण अपने को कर्ज चुकाने में असमर्थ कंपनियों को दिवाला संहिता के तहत कानूनी कार्रवाई से कुछ समय के लिए मोहलत देना है।

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निशित देसाई एसोसिएट्स की संस्थापक भागीदार प्रतिभा जैन ने कहा, ‘यह कदम स्वागत योग्य है।’

उन्होंने कहा कि इस समय ऐसे क्षेत्रों की बहुत-सी कंपनियां वित्तीय दबाव में हैं जिन्हें सरकार से प्रोत्साहन नहीं मिला है। इसके अलावा यदि ऐसा न होता तो न्यायिक प्रणाली (राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण) इस नए कानून के तहत इतने मामले आ सकते थे कि उन्हें संभालना कठिन हो जाता।

सिरिल अमरचंद मंगलदास के भागीदार एल. विश्वनाथन ने कहा कि इस अध्यादेश से कंपनियों को ‘सांस लेने का मौका मिला है। इससे कोराना वायरस संबंधी वित्तीय संकट के कारण चूक के मामलों को वैकल्पिक तरीकों से हल किया जा सकेगा।’

सिंह एंड एसोसिएट्स की वरिष्ठ भागीदार डेजी चावला ने कहा कि यह स्वागत योग्य कदम है क्योंकि इस समय कोरोना वायरस महामारी से दुनियाभर में संकट है।

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