जरुरी जानकारी | दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस को 4,600 करोड़ रुपये के भुगतान संबंधी आदेश पर पुनर्विचार से इनकार

नयी दिल्ली, दो दिसंबर उच्चतम न्यायालय ने रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की अनुषंगी इकाई दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड (डीएएमईपीएल) को करीब 4,600 करोड़ रुपये के भुगतान संबंधी मध्यस्थता न्यायाधिकरण के आदेश को सही ठहराने वाले अपने निर्णय की समीक्षा करने से इनकार कर दिया है।

न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट की पीठ ने दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) की तरफ से दायर पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है। पीठ ने 23 नवंबर को दिए इस आदेश में कहा है, "हमारी नजर में आदेश की समीक्षा का कोई मामला नहीं बनता है।"

इससे पहले गत नौ सितंबर को उच्चतम न्यायालय ने डीएएमईपीएल के पक्ष में आए मध्यस्थता न्यायाधिकरण के फैसले को सही ठहराया था। न्यायाधिकरण ने मई 2017 के अपने फैसले में डीएमआरसी को कहा था कि उसे डीएएमईपीएल को करीब 4,600 करोड़ रुपये बकाये का भुगतान करना होगा।

उस समय उच्चतम न्यायालय ने मध्यस्थता न्यायाधिकरण के निर्णय को पलटने वाले दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को भी निरस्त कर दिया था।

इसके पहले डीएएमईपीएल ने एयरपोर्ट एक्सप्रेस मेट्रो के परिचालन से खुद को यह कहते हुए अलग कर लिया था कि ढांचागत खामियों की वजह से इस लाइन पर मेट्रो परिचालन व्यवहारिक नहीं है।

इसके बाद रिलायंस समूह की कंपनी ने लंबित भुगतान को लेकर मध्यस्थता न्यायाधिकरण में डीएमआरसी के खिलाफ अपील की थी जहां से फैसला उसके पक्ष में आया था।

रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक यह राशि ब्याज समेत 4,600 करोड़ रुपये से अधिक है।

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