सिंह ने कहा कि विधेयक के प्रावधानों से विदेशों से आने वाले अभिदाय की निगरानी में आसानी होगी और पैसे के दुरूपयोग पर रोक लग सकेगी। उन्होंने पंजीकरण को आधार एवं पासपोर्ट से जोड़ने के कदम का स्वागत किया और कहा कि इससे फर्जी एनजीओ पर अंकुश लग सकेगा। उन्होंने कहा ‘‘अभी ऐसे हजारों एनजीओ हैं जिनका कोई अता-पता नहीं है। ’’
सिंह ने कहा कि कुछ एनजीओ विदेशों में भारत की छवि खराब करने में भी शामिल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ एनजीओ धर्मांतरण में भी लगे रहते हैं। इसके अलावा अलगाववादी ताकतों को भी एनजीओ के माध्यम से पैसे मिलने की बात सामने आती रही है।
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अन्नाद्रमुक के एस आर बालासुब्रमण्यम ने आशंका जतायी कि सरकार की मंशा अच्छी होने के बाद भी जमीनी स्तर पर इस विधेयक के प्रतिकूल असर हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि कई एनजीओ काफी अच्छा काम कर रहे हैं और ऐसे संगठनों का कामकाज प्रभावित नहीं होना चाहिए।
बीजद के प्रशांत नंदा ने भी विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि यह देश के हित में है। लेकिन यह गौर करना चाहिए कि वास्तविक एनजीओ पर इसका असर नहीं हो।
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जद (यू) के आरसीपी सिंह ने भी विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि इससे एनजीओ के कामकाज में पारदर्शिता आएगी और विदेशी अभिदाय लेने वाले संगठनों की निगरानी में आसानी होगी। सिंह ने भी प्रशासनिक खर्च की सीमा 20 प्रतिशत तक करने को अच्छा कदम बताया।
मनोनीत सदस्य स्वप्न दासगुप्ता ने एनजीओ के कामकाज पर निगरानी के लिए वृहद आयोग बनाए जाने का सुझाव देते हुए कहा कि उससे स्पष्ट हो सकेगा कि कौन एनजीओ वास्तविक हैं और कौन एनजीओ अन्य कार्यों में लगे हुए हैं।
उन्होंने कहा कि सिर्फ दिल्ली में ही एसबीआई में खाता खुलने के प्रावधान से दूरदराज के क्षेत्रों में काम करने वाले एनजीओ को दिक्कतें आ सकती हैं।
तेदेपा सदस्य के रवींद्र कुमार ने भी एसबीआई, दिल्ली में ही खाता की अनिवार्यता के प्रावधान को लेकर आशंका जतायी और कहा कि इससे वास्तविक एनजीओ को परेशानी हो सकती है।
अविनाश
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