जरुरी जानकारी | आरबीआई नियामकीय निगरानी को बेहतर बनाने के लिए कृत्रिम मेधा, मशीन लर्निंग का करेगा उपयोग

नयी दिल्ली, पांच अक्टूबर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की अपने व्यापक डेटाबेस का विश्लेषण करने और बैंकों तथा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) पर नियामकीय निगरानी को बेहतर बनाने के लिए उन्नत विश्लेषण, कृत्रिम मेधा (एआई) और मशीन लर्निंग का अधिकाधिक इस्तेमाल करने की योजना है।

इस उद्देश्य के लिए केंद्रीय बैंक बाहरी विशेषज्ञों की सेवा लेने पर भी विचार कर रहा है।

आरबीआई निगरानी प्रक्रियाओं में एआई और मशीन लर्निंग (एमएल) का उपयोग पहले से ही कर रहा है। वह अब यह सुनिश्चित करने के लिए इसे उन्नत करने का इरादा रखता है कि उन्नत विश्लेषण का लाभ केंद्रीय बैंक में पर्यवेक्षण विभाग को मिल सके।

विभाग निगरानी जांच के लिए एमएल मॉडल विकसित कर रहा है और उनका इस्तेमाल कर रहा है।

आरबीआई के निगरानी या निरीक्षण के अधिकार के दायरे में बैंक, शहरी सहकारी बैंक, एनबीएफसी, भुगतान बैंक, लघु वित्तीय बैंक, स्थानीय क्षेत्र बैंक, कर्ज सूचना कंपनियां और चुनिंदा अखिल भारतीय वित्तीय संस्थान आते हैं।

केंद्रीय बैंक ने आधुनिक विश्लेषण, कृत्रिम मेधा और मशीन लर्निंग के परामर्शदाताओं की सेवा लेने के लिए रुचि पत्र पेश किया है। इसमें कहा गया है कि इसका उद्देश्य रिजर्व बैंक की डेटा आधारित निगरानी क्षमताओं को बढ़ाने का है।

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