देश की खबरें | रॉ को आरटीआई अधिनियम के तहत छूट, जब तक मानवाधिकार या भ्रष्टाचार का मामला न बने : अदालत

नयी दिल्ली, तीन मई दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि भारत की खुफिया एजेंसी रिसर्च एनालिसिस विंग (रॉ) को सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत छूट है और जब तक आरटीआई अर्जी दायर करने वाले व्यक्ति द्वारा मांगी गई सूचना मानवाधिकार या भ्रष्टाचार के मुद्दों से संबंधित नहीं है, तब तक इसका खुलासा नहीं किया जा सकता।

अदालत का यह आदेश एक आरटीआई आवेदक की एक याचिका पर आया है, जिसमें एक निश्चित अवधि के दौरान रॉ के एक पूर्व प्रमुख के रिहाइशों की जानकारी का खुलासा करने की मांग की गई थी।

अदालत ने याचिकाकर्ता को जानकारी प्रदान करने से इनकार करने वाले सीआईसी के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 24 कहती है कि यह दूसरी अनुसूची में निर्दिष्ट सुरक्षा और खुफिया संगठनों पर लागू नहीं होती है तथा रॉ उनमें से एक है।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने कहा, "रॉ एक ऐसा संगठन है जिसका विशेष रूप से आरटीआई अधिनियम की अनुसूची में उल्लेख किया गया है। यह एक छूट-प्राप्त संगठन है। जब तक मांगी गई जानकारी की प्रकृति मानवाधिकारों या भ्रष्टाचार से संबंधित मुद्दों से संबंधित नहीं होगी, तब तक जानकारी का खुलासा नहीं किया जा सकता है।"

याचिकाकर्ता निशा प्रिया भाटिया ने जनवरी 2012 में भारतीय पुलिस सेवा के 1972 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के अधिकारी एस के त्रि़पाठी की 1986 से लेकर अब तक की रिहाइश के बारे में जानकारी मांगी थी।

जब याचिकाकर्ता को कोई जवाब नहीं मिला तो उसने सीआईसी का दरवाजा खटखटाया, जिसने 2017 में निष्कर्ष निकाला कि रॉ को धारा 24 के तहत एक छूट-प्राप्त संगठन के रूप में कवर किया गया है और अपवाद के लिए वर्तमान मामले में मानवाधिकार या भ्रष्टाचार का कोई मामला नहीं बनता है।

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