विदेश की खबरें | रानिल विक्रमसिंघे श्रीलंका के नए राष्ट्रपति निर्वाचित

कोलंबो, 20 जुलाई एक अभूतपूर्व कदम के तहत श्रीलंका की संसद ने कार्यवाहक राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे को बुधवार को देश का नया राष्ट्रपति निर्वाचित किया। इससे नकदी के संकट से जूझ रहे इस द्वीपीय राष्ट्र को उबारने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ जारी वार्ता के बरकरार रहने की उम्मीद की जा सकती है। लेकिन यह घटनाक्रम सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के गुस्से की आग को भड़का सकता है जो कई सप्ताह से विक्रमसिंघे के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

देश में नए राष्ट्रपति के चुनाव के लिए मतदान सुबह दस बजे शुरू हुआ था। छह बार देश के प्रधानमंत्री रह चुके विक्रमसिंघे (73) को 225 सदस्यीय सदन में 134 सदस्यों का मत हासिल हुआ, वहीं उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी डलास अल्हाप्पेरुमा को 82 मत मिले। वामपंथी जनता विमुक्ति पेरामुना (जेवीपी) के नेता अनुरा कुमारा दिसानायके को महज तीन वोट मिले।

संसद के अध्यक्ष महिंदा यापा अभयवर्धने ने परिणामों की घोषणा की।

विक्रमसिंघे ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बरकरार रखने के लिए संसद का आभार व्यक्त किया और राष्ट्रपति पद के दोनों प्रतिद्वंद्वियों तथा पूर्व राष्ट्रपतियों-महिंदा राजपक्षे और मैत्रीपाला सिरिसेना से सहयोग मांगा। साथ ही सांसदों से मिल कर नए तरीके से काम करने की अपील की।

उन्होंने कहा, ‘‘ लोग हमसे पुराने तरीके से काम नहीं चाहते। मैं विपक्ष के नेता सजित प्रेमदासा तथा अन्य विपक्षी दलों ,पूर्व राष्ट्रपतियों महिंदा राजपक्षे और मैत्रीपाला सिरिसेना से साथ मिलकर काम करने की अपील करता हूं।’’

विक्रमसिंघे ने कहा, ‘‘ हम पिछले 48घंटे से बंटे हुए थे। वह वक्त अब समाप्त हो गया है। अब हमें मिल कर काम करना है।’’

विक्रमसिंघे ने कहा, ‘‘अब चूंकि यह चुनाव समाप्त हो गया है तो हमें विभेद भी समाप्त करना चाहिए....मैं आपसे बात करने के लिए तैयार हूं।’’

देश में अब तक के सबसे भीषण आर्थिक संकट से निपटने में सरकार की नाकामी के बाद लोग सड़कों पर उतर आए थे और राजनीतिक उथल-पुथल तथा देश में फैले अराजकता के माहौल के बीच गोटबाया राजपक्षे ने राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था इसके बाद विक्रमसिंघे को कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाया गया था। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच राष्ट्रपति चुनाव गुप्त मतदान के जरिए हुआ। 223 सांसदों ने मतदान में हिस्सा लिया, जबकि दो सांसदों ने इससे दूरी बनाई। चार वोट रद्द कर दिए गए और 219 वोट वैध माने गए।

राष्ट्रपति चुनाव में मुकाबला कार्यवाहक राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे, डलास अल्हाप्पेरुमा और वामपंथी जनता विमुक्ति पेरामुना (जेवीपी) के नेता अनुरा कुमारा दिसानायके के बीच था।

नए राष्ट्रपति के पास पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे का शेष कार्यकाल पूरा करने का जनादेश है। राजपक्षे का कार्यकाल नवंबर 2024 तक था।

विक्रमसिंघे को भारत और उसके नेताओं का करीबी माना जाता है। साढ़े चार दशक के कार्यकाल में उन्होंने कई अहम पद संभाले हैं।

देश में 44वर्ष में ऐसा पहली बार हुआ है जब श्रीलंका की संसद ने सीधे राष्ट्रपति का चुनाव किया है।

एसएलपीपी के अध्यक्ष जी एल पीरिस ने मंगलवार को कहा था कि सत्तारूढ़ श्रीलंका पोदुजाना पेरामुना (एसएलपीपी) पार्टी के अधिकतर सदस्य इससे अलग हुए गुट के नेता अल्हाप्पेरुमा को राष्ट्रपति पद के लिए और प्रमुख विपक्षी नेता सजित प्रेमदासा को प्रधानमंत्री पद के लिए चुने जाने के पक्ष में हैं।

श्रीलंका में 1978 के बाद से पहली बार राष्ट्रपति का चुनाव सांसदों द्वारा गुप्त मतदान के जरिए हुआ। इससे पहले 1993 में कार्यकाल के बीच में ही राष्ट्रपति का पद तब खाली हुआ था, जब तत्कालीन राष्ट्रपति रणसिंघे प्रेमदासा की हत्या कर दी गई थी। उस वक्त डी बी विजयतुंगा को संसद ने सर्वसम्मति से प्रेमदासा का कार्यकाल पूरा करने का जिम्मा सौंपा था।

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