जयपुर, 18 जुलाई राजस्थान विधानसभा ने राजस्थान संगठित अपराध का नियंत्रण विधेयक – 2023 मंगलवार को पारित कर दिया जिसमें अपराधियों की संपत्ति जब्त करने, विशेष अदालतों की स्थापना और विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति के प्रावधान हैं। इसके साथ ही सदन ने राजस्थान कारागार विधेयक-2023 ध्वनिमत से पारित कर दिया।
राजस्थान संगठित अपराध का नियंत्रण विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री शांति कुमार धारीवाल ने कहा कि राज्य में संगठित अपराधों पर रोक लगाने तथा पुलिस को सशक्त बनाने के लिए राजस्थान संगठित अपराध का नियंत्रण विधेयक-2023 लाया गया है। उन्होंने कहा कि इस अधिनियम के प्रावधान राज्य में संगठित अपराध को नियंत्रित करने में कारगर साबित होंगे।
मंत्री ने कहा कि विधेयक में अपराधियों द्वारा अर्जित संपत्ति को जब्त करने के साथ ही विशेष अदालतों की स्थापना एवं विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति करने के प्रावधान किये गए हैं ताकि मुकदमों का शीघ्र निस्तारण हो सके। उन्होंने कहा कि इसमें आरोपियों की जमानत व अग्रिम जमानत नहीं होने के भी प्रावधान किये गए हैं।
उन्होंने बताया कि राज्य में अपराध की प्रवृत्तियों के अध्ययन से यह प्रकट हुआ है कि पिछले दशक में राज्य में अपराध के स्वरूप में बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि आपराधिक गिरोहों ने शूटर, मुखबिर, गुप्त सूचना देने वाले और हथियार आपूर्तिकर्ताओं के साथ मिलकर संगठित नेटवर्क स्थापित कर लिए हैं। उन्होंने कहा कि कुछ समय से इन अपराधियों ने जनता में डरावनी छवि बना ली है।
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे अपराधियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए आवश्यक कठोर कानून की यह विधेयक पूर्ति करेगा।’’
धारीवाल ने बताया कि इस अधिनियम की धारा-28 के अंतर्गत उच्च न्यायालय को विशेष अदालतों के सम्बन्ध में नियम बनाने की शक्तियां प्रदान की गई हैं। उन्होंने कहा कि वहीं, धारा-29 के अंतर्गत राज्य सरकार अधिनियम के प्रयोजनों को क्रियान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी।
उन्होंने बताया कि दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा-5 के अंतर्गत राज्य सरकार विशेष प्रक्रिया के कानून बना सकती है, जिसके अंतर्गत यह विधेयक लाया गया है। उन्होंने कहा कि इस तरह का कानून बनाने वाला राजस्थान देश का चौथा राज्य है। उन्होंने कहा कि पूर्व में महाराष्ट्र, कर्नाटक एवं गुजरात में इस तरह के कानून लागू किये जा चुके हैं।
चर्चा के बाद सदन ने विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इससे पहले जनमत जानने हेतु विधेयक को भेजने का प्रस्ताव सदन ने ध्वनिमत से अस्वीकार कर दिया।
वहीं सदन ने राजस्थान कारागार विधेयक – 2023 को भी चर्चा के बाद ध्वनिमत से पारित किया।
विधेयक पर हुई चर्चा के बाद जवाब देते हुए कारागार मंत्री टीकाराम जूली ने कहा कि राज्य की जेलों में बंदियों के लिए व्यवस्थाओं को मजबूत बनाना राज्य सरकार का ध्येय है। उन्होंने कहा कि बंदियों के लिए सुधारात्मक उपबंध, मूलभूत मानवाधिकारों के हक, उनके कौशल विकास एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम को सुनिश्चित करने के लिए यह विधेयक लाया गया है।
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