नयी दिल्ली, 15 नवंबर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को सवाल किया कि ‘‘परम मित्र’’ के भाइयों ने "अमृत काल" के दौरान भारत क्यों छोड़ दिया। गांधी की यह टिप्पणी ऐसे समय आयी है, जब मीडिया में ऐसी खबर आयी है कि गौतम अडाणी के बड़े भाई विनोद अडाणी सहित कुछ कारोबारी उन 66 भारतीयों में शामिल हैं, जिन्हें साइप्रस में 'गोल्डन पासपोर्ट' मिला।
गांधी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘'अमृत काल' में 'परम मित्र' के भाई भारत छोड़ कर क्यों भागे? 'गोल्डन पासपोर्ट' मतलब चोरी का सुनहरा मौका - जनता का पैसा चुराओ, शेल कम्पनी बनाओ और विदेश में उड़ाओ।’’
उन्होंने यह बात मीडिया में ऐसी खबरें आने के बाद कही, जिनमें कहा गया था कि विनोद अडाणी और पंकज ओसवाल उन 66 भारतीयों में शामिल थे, जिन्हें 'गोल्डन पासपोर्ट' मिला था। वर्ष 2007 में शुरू हुई "गोल्डन पासपोर्ट" योजना को "साइप्रस निवेश कार्यक्रम" भी कहा जाता था और इसने आर्थिक रूप से मजबूत व्यक्तियों को साइप्रस की नागरिकता प्रदान करने की सुविधा प्रदान की थी, जिससे देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आया।
केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आईटी सेल प्रभारी अमित मालवीय ने गांधी पर पलटवार करते हुए कहा कि यह कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के तहत हुआ कि भारत-साइप्रस कर संधि ने कर चोरों के लिए एक पनाहगाह बनाया।
मालवीय ने एक्स पर पोस्ट किया, ‘‘आपने निवेशकों के लिए पूंजीगत लाभ कर की अनदेखी कर लाल कालीन बिछा दिया, जबकि साइप्रस इस तरह का कर नहीं लगाता है। इसमें कम विदहोल्डिंग कर की दर के साथ आपको साइप्रस में कर पनाहगाह बनाने, व्यवसायों को लुभाने और व्यक्तियों को साइप्रस में धन लगाने के लिए एक आदर्श नुस्खा मिल गया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि भाजपा के नेतृत्व वाले राजग गठबंधन के सत्ता में आने पर, हमने इस चाल को समझा और तत्काल, निर्णायक कार्रवाई की। 2016 में, हमने साइप्रस के साथ दोहरा कराधान बचाव संधि (डीटीएए) में सिर्फ बदलाव नहीं किया, हमने इसमें आमूल-चूल परिवर्तन किया। हमारा संशोधन, नवंबर 2013 की पुरानी तिथि से लागू हुआ और यह पासा पलटने वाला था। इसने पूंजीगत लाभ के कराधान को सीधे उस स्थान पर स्थानांतरित कर दिया जहां आय होती है - स्रोत देश - बजाय निवेशकों को उनके निवास के देश के पर्दे के पीछे छिपने की अनुमति देने के। यह सिर्फ एक नीतिगत बदलाव नहीं था; यह आपके द्वारा चलाये जा रहे कर बचाव ‘सर्कस’ को एक सीधी चुनौती थी।’’
माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट पर गांधी की पोस्ट पर प्रतिक्रिया जताते हुए उन्होंने कहा, ‘‘आइए एक अप्रैल, 2017 से पहले किए गए निवेश के लिए हमारे द्वारा पेश किए गए ‘ग्रैंडफादरिंग क्लॉज’ के बारे में बात करते हैं। यह सिर्फ एक प्रावधान नहीं था। हमने इसमें एक नयी व्यवस्था में निष्पक्ष बदलाव सुनिश्चित किया। इसके तहत इस समयसीमा से पहले किए गए निवेश के लिए निवेशक के निवास देश में पूंजीगत लाभ पर कर लगाया जाएगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह बदलाव बहुत बड़ा था। यह सिर्फ उचित कराधान के बारे में नहीं था। इसने कर चोरी के लिए विदेशी संस्थाओं का उपयोग बंद कर दिया। तथाकथित 'गोल्डन पासपोर्ट' जिसे आप बढ़ावा देने का हम पर आरोप लगाते हैं? यह आपके शासन का अवशेष है, यह उस अपारदर्शी, गुप्त सौदे का प्रतीक है जिसका आपने समर्थन किया है।’’
मालवीय ने दावा किया, ‘‘तो, आइए हम रिकॉर्ड को सही करते हैं। जो लोग चले गए हैं वे आपके 'परम मित्र' हैं। उनके जाने का दायित्व आप पर है। कर पनाहगाह और अपारदर्शी वित्तीय प्रथाओं को बढ़ावा देने की आपकी विरासत ने उन्हें बाहर जाने दिया। हमारे सुधारों ने न केवल इन खामियों को भरा, बल्कि पारदर्शी और जवाबदेह कर प्रशासन के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया है। आपके आरोप आपकी पार्टी के संदिग्ध अतीत की याद दिलाते हैं।’’
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