ब्रिक्स के शिखर सम्मेलन को रूस द्वारा पश्चिमी देशों की ताकत को चुनौती देने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। पुतिन ने बुधावर को ब्रिक्स की बैठक की शुरुआत में अपने एजेंडे के हिस्से के रूप में वित्त क्षेत्र में सहयोग के बढ़ते दायरे का जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि बैठक में शामिल होने वाले देश क्षेत्रीय संघर्षों सहित कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों तथा अन्य देशों को शामिल कर समूह के विस्तार पर भी चर्चा करेंगे।
पुतिन ने कहा, ‘‘विश्व पटल पर ब्रिक्स की रणनीति वैश्विक समुदाय के मुख्य हिस्से के प्रयासों की पुष्टि करती है। इसे ही तथाकथित वैश्विक बहुलता कहा जाता है।’’
ब्रिक्स की शुरुआत में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका इसके सदस्य थे हालांकि अब इसके दायरे को बढ़ाकर समूह में ईरान, मिस्र, इथियोपिया, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब को शामिल किया गया है।
इसके अलावा तुर्किये, अजरबैजान और मलेशिया ने औपचारिक रूप से सदस्य बनने के लिए आवेदन किया है तथा कई अन्य देशों ने इसमें शामिल होने में रुचि दिखाई है।
कजान शहर में ब्रिक्स के तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन में 36 देशों के नेता शिरकत कर रहे हैं। यूक्रेन पर रूस की कार्रवाई को लेकर उसे अलग-थलग करने के अमेरिका के प्रयासों की विफलता को भी सम्मेलन के जरिए सामने लाने का प्रयास है।
रूस ने ब्रिक्स को विदेश नीति पर आयोजित ‘‘अब तक का सबसे बड़ा आयोजन’’ बताया है।
शिखर सम्मेलन की शुरुआत से पहले पुतिन से मंगलवार को मोदी, शी और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने मुलाकात की थी। पुतिन सम्मेलन से इतर विभिन्न देशों के साथ द्विपक्षीय बैठकें करने वाले हैं।
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