पुणे, 28 अगस्त महाराष्ट्र के पुणे में एक सात वर्षीय बच्चे ने कोविड-19 के बाद बेहद कम मामलों में सामने आने वाली जानवेला जटिलता ''हाइपर-इन्फ्लेमेंटरी सिंड्रोम'' को मात दी है।
डॉक्टरों ने शुक्रवार को बताया कि शहर के एक अस्पताल में ही उसका सफल इलाज किया गया।
पुणे नगर निगम के एक कर्मचारी का बेटा तीन सप्ताह पहले अपने माता-पिता और भाई के साथ ही खुद भी कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में आ गया था। हालांकि, वे सभी संक्रमणमुक्त हो गए थे।
हाइपर-इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम कोविड-19 से जुड़ा हुआ है। इस खतरनाक बीमारी में महत्वपूर्ण अंगों समेत पूरे शरीर में सूजन आ जाती है।
निजी अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक, लड़के को दो दिन से उल्टी, पेट में दर्द और बुखार की शिकायत के बाद 10 अगस्त को आईसीयू में भर्ती कराया गया था।
लड़के का इलाज करने में शामिल डॉक्टर भक्ति सारंगी ने कहा कि उसकी हालत नाजुक थी क्योंकि उसकी नब्ज दर उच्च थी और रक्चचाप कम था।
उन्होंने बताया कि सबसे पहले लड़के की बीमारी का पता लगाया गया जोकि हाइपर-इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम पाया गया।
सारंगी ने कहा कि तीन दिन की मशक्कत के बाद भी उसकी सेहत में सुधार नहीं दिख रहा था लेकिन उसके बाद दी गई दवाइयों से 12 घंटे के भीतर ही बुखार और पेट दर्द से आराम मिल सका।
उन्होंने कहा कि 11 दिनों तक इलाज के बाद लड़के को अस्पताल से छुट्टी दी गई।
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