जरुरी जानकारी | प्रस्तावित विकास वित्त संस्थान को परियोजनाओं के लिए वैश्विक बाजार से जुटाना चाहिये धन: एसबीआई प्रमुख

नयी दिल्ली, 15 दिसंबर आधारभूत ढांचा परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए प्रस्तावित विकास वित्त संस्थान (डीएफआई) को सरकारी समर्थन के पुराने तौर तरीकों को अपनाने के बजाय विदेशी पूंजी को आकर्षित करना चाहिए। भारतीय स्टेट (एसबीाआई) के चेयरमैन दिनेश खारा ने मंगलवार को यह कहा।

सरकार आधारभूत ढांचा क्षेत्र की वित्तपोषण जरूरतों को पूरा करने के लिए एक विकास वित्त संस्थान स्थापित करने पर सक्रिय रूप से विचार कर रही है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय अवसंरचना परियोजना पाइपलाइन के लिये अगले पांच साल के दैरान 2024-25 तक 111 लाख करोड़ रुपये की भारी भरकम धनराशि की आवश्यकता है।

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खारा ने सीआईआई द्वारा आयोजित आभासी सम्मेलन में कहा, ‘‘यह डीएफआई अगर आता है तो शायद इस डीएफआई के धन का स्रोत पहले के डीएफआई के मुकाबले अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र से ज्यादा होना चाहिये। पहले के डीएफआई के लिए सारा धन सरकार से प्राप्त होता था।’’

उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे के विकास के लिए धन की भारी आवश्यकता को देखते हुए विदेशी धन की बहुत आवश्यकता होगी।

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आईसीआईसीआई और आईडीबीआई जो कि अब बैंक बन चुके हैं अपने पिछले स्वरूप में डीएफआई ही थे। यहां तक ​​कि देश की सबसे पुरानी वित्तीय संस्था आईएफसीआई लिमिटेड ने भी विकास वित्त संस्थान के रूप में काम किया।

भारत में, पहला डीएफआई वर्ष 1948 में भारतीय औद्योगिक वित्त निगम (आईएफसीआई) की स्थापना के साथ चालू हुआ था। इसके बाद, भारतीय औद्योगिक ऋण एवं निवेश निगम (आईसीआईसीआई) की स्थापना वर्ष 1955 में विश्व बैंक के समर्थन के साथ डीएफआई के रूप में की गई थी। इसके बाद भारतीय औद्योगिक विकास बैंक (आईडीबीआई) 1964 में अस्तित्व में आया। इनकी स्थापना ढांचागत परियोजनाओं के लिये दीर्घकालिक वित्त सुविधा उपलब्ध कराने के लिये की गई थी।

राजेश

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