ताजा खबरें | अंतरिक्ष क्षेत्र में आम आदमी, उद्योगों के प्रवेश से रोक के कारण बाधित हुई प्रगति : जितेन्द्र सिंह

नयी दिल्ली, 20 सितंबर अंतरिक्ष क्षेत्र की उपलब्धियों का नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा श्रेय लिये जाने के विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने बुधवार को राज्यसभा में दावा किया कि इस क्षेत्र को आम आदमी एवं उद्योगों के लिए बंद करके रखा गया था जिससे इसकी प्रगति इतने वर्षों तक बाधित रही। उन्होंने बताया कि देश में अभी अंतरिक्ष विज्ञान क्षेत्र में 150 स्टार्ट अप काम कर रहे हैं।

अंतरिक्ष विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेन्द्र सिंह ‘भारत की गौरवशाली अंतरिक्ष यात्रा चंद्रयान-3’ की सफल सॉफ्ट लैंडिंग विषय पर राज्यसभा में अल्पकालिक चर्चा में हस्तक्षेप कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने दर्शक दीर्घा में बैठे, चंद्रयान-3 के परियोजना निदेशक पी वीरमुथुवेल की ओर सभी सदस्यों का ध्यान आकृष्ट किया। इस पर सदस्यों ने मेजें थपथपा कर वरिष्ठ वैज्ञानिक का स्वागत किया।

सिंह ने इसरो के वैज्ञानिक टीम की सराहना करते हुए कहा कि यदि वहां रत्ती भर भी राजनीति रही होती तो देश चंद्रयान-3 की सफलता अर्जित नहीं कर पाता। उन्होंने कहा कि चंद्रयान अभियान की शुरुआत तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा इसे दी गयी मंजूरी के साथ हुई थी। उन्होंने कहा कि इस श्रृंखला का तीसरा अभियान प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हो रहा है।

उन्होंने कहा कि यदि आप अतीत में जायें और पुरानी तस्वीरों को देखें तो मशहूर वैज्ञानिक विक्रम साराभाई लांचर वाहन को साइकिल कैरियर पर ले जाते हुए दिखाई पड़ते हैं। उन्होंने प्रश्न किया, ‘‘उस समय प्रधानमंत्री कौन थे? उस समय किसकी सरकार थी?’’

सिंह ने कहा, ‘‘हमारे वैज्ञानिकों में कभी प्रतिभा-योग्यता की कमी नहीं थी, निष्ठा भी थी। मेहनत करने का जज्बा था और आंखों में सपने थे। कुछ नहीं होते हुए भी कुछ कर गुजरने का साहस था। लेकिन अभाव था अनुकूलता का, वह अभाव अब पूरा हुआ।’’

उन्होंने कहा कि जब देश ने 1960 के दशक में अपना अंतरिक्ष कार्यक्रम शुरू किया तो एक तरफ साराभाई जैसे वैज्ञानिकों के पास परिवहन का अभाव था वहीं अमेरिका और सोवियत संघ चंद्रमा की सतह पर मनुष्य को उतारने की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह अंतर था उस समय।

सिंह ने प्रश्न किया कि ऐसा क्या हुआ कि देश के वैज्ञानिकों ने इतनी ‘लंबी छलांग’ लगाई? क्या कोई जादू की छड़ी आ गयी थी? उन्होंने कांग्रेस सदस्य जयराम रमेश द्वारा कही गयी इस बात का जिक्र किया कि यह कोई सैन्य कार्यक्रम नहीं था।

अंतरिक्ष विज्ञान मंत्री ने रमेश की इस बात पर प्रश्न किया कि यदि यह सैन्य कार्यक्रम नहीं था तो आम आदमी के श्रीहरिकोटा में जाने पर रोक क्यों लगायी थी? उन्होंने कहा, ‘‘पहली बार ऐसा हुआ कि श्रीहरिकोटा के द्वार 2020 में (आम आदमी के लिए) खोले गये।’’ उन्होंने कहा कि उस समय कौन प्रधानमंत्री थे, वह यह नहीं बताना चाहते क्योंकि यह चर्चा प्रधानमंत्रियों पर नहीं है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आपने (कांग्रेस सदस्य रमेश ने) इसे नेहरुयुगीन चर्चा बनाने का प्रयास किया। मैं नेहरू द्वारा की गयी भारी भूलों का जिक्र नहीं करना चाहता।’’

सिंह ने कहा कि आम आदमी एवं मीडिया को श्रीहरिकोटा के भीतर झांकने की भी अनुमति नहीं थी। उन्होंने कहा, ‘‘आपने (पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने) अंतरिक्ष विज्ञान विभाग को गोपनीयता के चक्र के पीछे छिपाये रखा...आपने उद्योग को इसमें शामिल होने की अनुमति नहीं दी। इसी वजह से प्रगति रुक गयी और हमें वहां पहुंचने में 75 वर्ष लग गये जहां हम (अभी) पहुंच पाए हैं।’’

उन्होंने कहा कि 2014 से पहले अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में मात्र चार स्टार्ट अप थे और यह बताना शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि आज इस क्षेत्र में 150 स्टार्ट अप हैं।

सिंह ने सवाल किया कि पांच आईआईटी संस्थानों को लेकर जश्न क्यों मनाया जा रहा है? मंत्री ने कहा, ‘‘हम सभी कालेजों और संस्थानों की उपलब्धियों का जश्न मना रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3 के परियोजना निदेशक किसी आईआईटी से नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने महिला वैज्ञानिकों की भी सराहना की है तथा चंद्रयान-3 अभियान की संयुक्त परियोजना निदेशक महिला वैज्ञानिक कल्पना हैं।

सिंह ने कांग्रेस सदस्य रमेश पर आरोप लगाया कि वह अंतरिक्ष क्षेत्र की भारत की यात्रा के घटनाक्रम को सुनाकर तथ्यों को छिपाने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यदि केवल अंतरिक्ष क्षेत्र को ही देखा जाए तो पिछले नौ वर्ष में कोष में 142 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष विभाग का बजट 2013-14 में 5168 करोड़ रूपये था जो 2023-24 में बढकर 12 करोड़ रूपये से अधिक हो गया। उन्होंने अन्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभागों के बजट में हुई वृद्धि से संबंधित आंकड़ों का उल्लेख किया।

सिंह ने कहा कि 75 साल में जिन मुद्दों का समाधान नहीं किया गया, उन पर ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा कि अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन में करीब 80 प्रतिशत कोष गैर सरकारी स्रोतों से प्राप्त होने की परिकल्पना की गयी है।

सिंह ने कहा, ‘यदि हमें वैश्विक स्तर पर विकास करना है तो हमें वैश्विक मानकों का अनुपालन करना होगा। हमें वैश्विक चुनौतियों के लिए तैयार रहना पड़ेगा। हमें उन्हें वैश्विक रणनीतियों में मात देनी होगी। ’’

उन्होंने कहा कि जर्मनी और अमेरिका जैसे कई देशों में अनुसंधान से संबंधित सोसाइटी हैं। उन्होंने प्रश्न किया ‘‘हमारे यहां यह क्यों नहीं है? हमें 14 प्रधानमंत्री के शासनकाल तक क्यों प्रतीक्षा करनी पड़ी? इसका उत्तर कौन देगा?’’

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