देश की खबरें | प्रोफेसर को छुट्टी से इनकार की कोई वजह नहीं दिखती : अदालत ने जेएनयू से कहा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) द्वारा अपने एक प्रोफेसर को फ्रांसीसी शोध संस्थान की तरफ से मिली नौ महीने की फेलोशिप के लिये छुट्टी नहीं देने की कोई वजह उसे नजर नहीं आती।
नयी दिल्ली, नौ सितंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) द्वारा अपने एक प्रोफेसर को फ्रांसीसी शोध संस्थान की तरफ से मिली नौ महीने की फेलोशिप के लिये छुट्टी नहीं देने की कोई वजह उसे नजर नहीं आती।
न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने कहा, “पहली नजर में मुझे कोई कारण नजर नहीं आता कि फेलोशिप पूरी करने के लिये याचिकाकर्ता को असाधारण अवकाश (ईओएल) क्यों नहीं दिया जाना चाहिए।”
अदालत ने यह टिप्पणी जेएनयू की तरफ से पेश हुए वकील के उस बयान के बाद दी जिसमें उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने प्रोफेसर उदय कुमार की ईओएल देने के अनुरोध को खारिज कर दिया है।
उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय की वकील मोनिका अरोड़ा अस्वस्थ थीं और इसलिये मामले को किसी अगली तारीख तक के लिये स्थगित कर दिया जाए।
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प्रोफेसर की तरफ से पेश हुए वकील अभिक चिमनी ने कहा कि उनके मुवक्किल को एक अक्टूबर को फ्रांस के लिये रवाना होना है, ऐसे में याचिका पर फैसले में और विलंब का उन पर बुरा प्रभाव होगा।
अदालत ने इस मामले में सुनवाई की अगली तारीख 14 सितंबर तय करते हुए कहा कि याचिका में उठाया गया मामला अत्यावश्यक है और विश्वविद्यालय को निर्देश दिये की अगर अरोड़ा खराब स्वास्थ्य की वजह से उस तारीख पर पेश नहीं हो सकती हैं तो वह कोई वैकल्पिक व्यवस्था करे।
विश्वविद्यालय के अंग्रेजी अध्ययन विभाग में प्रोफेसर कुमार ने विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद के 18 फरवरी 2020 के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें बिना वेतन के नौ महीनों के लिये उन्होंने असाधारण अवकाश दिये जाने का अनुरोध किया था। 21 जनवरी को दिये अपने आवेदन में प्रोफेसर ने एक अक्टूबर 2020 से 30 जून 2021 तक का अवकाश दिये जाने का अनुरोध किया था।
याचिका में कुमार ने इसके साथ ही तीन मार्च, 12 जून और सात जुलाई के जेएनयू के पत्रों को दरकिनार करने की भी मांग की है जिसके जरिये नौ महीने के ईओएल के उनके अनुरोधों को कथित तौर पर बिना कारण बताये खारिज किया गया है।
उन्होंने अपनी दलील में कहा है कि उन्हें अक्टूबर 2020 से नौ महीने की अवधि के लिए फ्रांस के नैनटेस इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडी में फेलोशिप की पेशकश की गई है, जो अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा का एक शोध संस्थान है।
कुमार ने दलील दी कि पिछले चार वर्षों में उन्होंने एक भी ईओएल का लाभ नहीं उठाया है और अपने पूरे कैरियर में उन्होंने केवल दो ईओएल ली हैं।
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