जरुरी जानकारी | अप्रैल-जून में सिर्फ 10 प्रतिशत विनिर्माण इकाइयो का उत्पादन बढ़ा : फिक्की सर्वे

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून की तिमाही में सिर्फ 10 प्रतिशत विनिर्माण इकाइयां ऐसी रहीं, जिनके उत्पादन में बढ़ोतरी दर्ज हुई। उद्योग मंडल फिक्की के तिमाही सर्वे में यह जानकारी दी गई है। इससे पिछली तिमाही में 15 प्रतिशत विनिर्माण इकाइयों का उत्पादन बढ़ा था।

नयी दिल्ली, 19 जुलाई चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून की तिमाही में सिर्फ 10 प्रतिशत विनिर्माण इकाइयां ऐसी रहीं, जिनके उत्पादन में बढ़ोतरी दर्ज हुई। उद्योग मंडल फिक्की के तिमाही सर्वे में यह जानकारी दी गई है। इससे पिछली तिमाही में 15 प्रतिशत विनिर्माण इकाइयों का उत्पादन बढ़ा था।

सर्वे में बड़ी और लघु एवं मझोले उपक्रम (एसएमई) क्षेत्र की 300 से अधिक विनिर्माण इकाइयों के आंकड़ों को शामिल किया गया है। इन इकाइयों का सामूहिक वार्षिक कारोबार 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।

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सर्वे में कहा गया है कि लॉकडाउन पाबंदियों में ढील के बाद मांग और मौजूदा ऑर्डरों को देखते हुए कारखानों में परिचालन की दृष्टि से वाहन क्षेत्र सबसे बुरी तरह प्रभावित है। जिन अन्य क्षेत्रों का परिचालन निचले स्तर पर है उनमें चमड़ा और फुटवियर, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल्स तथा टेक्सटाइन मशीनरी क्षेत्र शामिल है।

सर्वे में शामिल 90 प्रतिशत लोगों ने अप्रैल-जून 2020-21 में कम या समान उत्पादन रहने की बात कही। 2019-20 की अंतिम तिमाही में ऐसा कहने वालों की संख्या 85 प्रतिशत थी।

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विनिर्माण क्षेत्र के लिए नियुक्ति परिदृश्य भी काफी कमजोर नजर आता है। सर्वे में शामिल 85 प्रतिशत इकाइयों का कहना था कि वे अगले तीन माह के दौरान अतिरिक्त नियुक्तियां नहीं करने जा रहीं।

फिक्की ने कहा कि बीते वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में यह बात कहने वाली इकाइयों की संख्या 78 प्रतिशत थी।

कोविड-19 की वजह से निर्यात को लेकर परिदृश्य भी काफी कमजोर दिखाई देता है। सिर्फ आठ प्रतिशत इकाइयों का कहना था कि 2020-21 की पहली तिमाही में उन्हें निर्यात में बढ़ोतरी की उम्मीद है। वहीं 10 प्रतिशत ने कहा कि उनका निर्यात इससे पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के समान रहेगा।

सर्वे में यह भी आकलन किया गया है कि क्या विनिर्माताओं के खरीद व्यवहार में बदलाव आया है और वे एक देश पर निर्भरता कम कर रहे हैं। सर्वे के नतीजों से पता चलता है कि वाहन, टेक्सटाइल मशीनरी और चमड़ा-फुटवियर कंपनियां कच्चे माल के वैकल्पिक स्रोतों की संभावना तलाश रही हैं।

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