जरुरी जानकारी | जनवरी-जुलाई में भंडारण, औद्योगिक स्थल परियोजनओं में निजी इक्विटी निवेश 92 प्रतिशत नीचे

नयी दिल्ली, दो अगस्त भंडारण और औद्योगिक कार्यस्थल परियोजनाओं में निजी इक्विटी निवेश इस साल के पहले छह महीने में 92 प्रतिशत कम होकर 10.2 करोड़ डॉलर यानी करीब 750 करोड़ रुपये पर आ गया।

कोरोना वायरस महामारी के कारण निवेशक सतर्कता बरत रहे हैं। परामर्श सेवा कंपनी कोलियर्स इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गयी।

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रिपोर्ट के अनुसार, इन क्षेत्रों में निवेश और पट्टा का बाजार गले साल भी नरम रहने की आशंका है, क्योंकि महामारी को लेकर निवेशक निर्णय लेने में धीमे हैं। हालांकि दीर्घावधि में इस क्षेत्र की संभावनाएं आशाजनक बनी हुई है।

कोलियर्स इंटरनेशन के आंकड़ों के अनुसार, भारत के औद्योगिक और भंडारण स्थल क्षेत्र में निजी इक्विटी निवेश जनवरी से जून के दौरान साल भर पहले के 125 करोड़ डॉलर यानी करीब 9,300 करोड़ रुपये से कम होकर महज 10.2 करोड़ डॉलर पर आ गया।

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रिपोर्ट में कहा गया, "2017 के बाद से, इस क्षेत्र ने 27,800 करोड़ रुपये (3.7 अरब डॉलर) के निवेश को आकर्षित किया है। वर्ष 2017 से जनवरी-जून 2020के बीच रियल एस्टेट क्षेत्र के कुल निजी इक्विटी निवेश का 17 प्रतिशत इस क्षेत्र में आया ।"

कंपनी ने कहा कि सरकार द्वारा किये गये सुधारों के कारण 2017 के बाद से औद्योगिक और भंडारण क्षेत्र ने महत्वपूर्ण निवेशकों को आकर्षित किया है। इन सुधारों में माल एवं सेवा कर (जीएसटी), क्षेत्र के लिये बुनियादी ढांचे की स्थिति पर ध्यान देना, लाजिस्टिक्स (रसद) पार्क नीति का निर्माण और मल्टीमॉडल बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर जैसे कदम शामिल हैं।

कोलियर्स ने कहा, "भंडारण क्षेत्र पहले बिखरे शेड और गोदामों के रूप में था। अब सरकारी नीतियों से प्रभावित होकर यह क्षेत्र संगठित हो रहा है।"

पुनर्गठित क्षेत्र की वृद्धि की संभावनाओं के दम पर इस क्षेत्र ने निवेशकों का महत्वपूर्ण ध्यान आकर्षित किया है। इस कारण कुल निजी इक्विटी निवेश में भंडारण व औद्योगिक क्षेत्र की हिस्सेदारी साल 2017 के बाद से ही लगातार बढ़ते जा रही है।

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