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जरुरी जानकारी | सस्ते विदेशी तेलों का आयात बढ़ने से घरेलू तेल कीमतों पर दबाव बरकरार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. देश में सस्ते खाद्यतेलों का आयात बढ़ने से मंगलवार को देशी तेल तिलहनों के भाव दबाव में बने रहे। दूसरी ओर लॉकडाऊन में ढील के बाद होटलों और छोटे खान पान की दुकानों की मांग बढ़ने से पाम तेल कीमतों में सुधार रहा।

जरुरी जानकारी | सस्ते विदेशी तेलों का आयात बढ़ने से घरेलू तेल कीमतों पर दबाव बरकरार

नयी दिल्ली, 21 जुलाई देश में सस्ते खाद्यतेलों का आयात बढ़ने से मंगलवार को देशी तेल तिलहनों के भाव दबाव में बने रहे। दूसरी ओर लॉकडाऊन में ढील के बाद होटलों और छोटे खान पान की दुकानों की मांग बढ़ने से पाम तेल कीमतों में सुधार रहा।

तेल उद्योग के कारोबारी सूत्रों ने कहा कि संभवत: पहली बार देखने को मिल रहा है मंडियों में पाम तेल दो अलग अलग भाव पर बिक रहे हैं और इन कारोबारियों को आशंका है कि पाम तेल के साथ पामोलीन सम्मिश्रित करके बेचे जाने की वजह से पामतेल के दो अलग अलग भाव है।

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सस्ते पामतेल की आयात बढ़ने से सोयाबीन डीगम की भी मांग कमजोर रही और सोयाबीन तेल कीमतों में हानि दर्ज हुई।

बाजार के कारोबारी सूत्रों ने कहा कि बाजार में पाम तेल के दो अलग अलग भाव हैं और सभवत: इसका कारण कच्चा पामतेल में पामोलीन का सम्मिश्रण किया जाना है। उन्होंने कहा कि देश में पामोलीन के आयात पर रोक है। उन्होंने कहा कि विदेशों में पामोलीन का भारी स्टॉक जमा है और आगे भी उत्पादन में वृद्धि के आसार हैं तथा इस बात की संभावना हो सकती है और मलेशिया व इंडोनेशिया में आगामी बम्पर फसल को संभालने के लिए विदेशी कंपनियां अपने पामोलीन के स्टॉक को खपाने का प्रयास कर रही हों।

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सूत्रों ने बताया कि संभावित रूप से सम्मिश्रण वाले कच्चा पामतेल (सीपीओ) का भाव राजधानी की मंडियों में अधिक यानी 7,360 रुपये क्विन्टल तथा बगैर मिलावट वाले सीपीओ का भाव 7,290 रुपये क्विन्टल है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस बात की जांच करानी चाहिये और प्रतिबंधित पामोलीन मिश्रित सीपीओ के आयातक कंपनियों का लाइसेंस रद्द करना चाहिये।

कारोबारी सूत्रों ने कहा कि इस सस्ते आयात के कारण सोयाबीन डीगम की मांग भी प्रभावित हुई है। इसके अलावा मंगलवार को वायदा कारोबार में भी सोयाबीन के भाव टूटने से यहां सोयाबीन दिल्ली, इंदौर कीमतों तथा सोयाबीन दाना (तिलहन) में मामूली गिरावट दर्ज हुई। इसके अलावा सस्ते तेलों का आयात बढ़ने से तिलहन फसल- सरसों दाना और मूंगफली दाना के भाव पूर्वस्तर पर बंद हुए।

सूत्रों ने कहा कि स्थानीय मांग होने के बावजूद सस्ते आयात के बढ़ने के कारण वायदा और हाजिर मंडियों में सूरजमुखी, सोयाबीन दाना जैसे तिलहनों के भाव लागत से भी कम हैं जिससे तिलहन उत्पादक किसान, तेल उद्योग और आम उपभोक्ता परेशान हैं।

मंगलवार को बंद भाव इस प्रकार रहे- (भाव- रुपये प्रति क्विंटल)

सरसों तिलहन - 4,665- 4,715 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये।

मूंगफली दाना - 4,740 - 4,790 रुपये।

वनस्पति घी- 965 - 1,070 रुपये प्रति टिन।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात)- 12,480 रुपये।

मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 1,875 - 1,925 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 9,700 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 1,540 - 1,680 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 1,640 - 1,760 रुपये प्रति टिन।

तिल मिल डिलिवरी तेल- 11,000 - 15,000 रुपये।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 9,180 रुपये।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 8,960 रुपये।

सोयाबीन तेल डीगम- 8,050 रुपये।

सीपीओ एक्स-कांडला-7,360 (संभावित रूप से पामोलीन सम्मिश्रित)

7,290 रुपये (बगैर सम्मिश्रित)।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 7,800 रुपये।

पामोलीन आरबीडी दिल्ली- 8,700 रुपये।

पामोलीन कांडला- 7,960 रुपये (बिना जीएसटी के)।

सोयाबीन तिलहन डिलिवरी भाव 3,660- 3,685 लूज में 3,395--3,460 रुपये।

मक्का खल (सरिस्का) - 3,500 रुपये

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(The above story first appeared on LatestLY on Jul 21, 2020 07:40 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).