देश की खबरें | कोरोना की पृष्ठभूमि में प्रणब मुखर्जी का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, एक सितंबर कोरोना वायरस महामारी की पृष्ठभूमि में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का मंगलवार दोपहर दिल्ली के लोधी रोड विद्युत शवदाह गृह में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान सेना की टुकड़ी ने पूर्व राष्ट्रपति को गार्ड ऑफ ऑनर और तोपों की सलामी दी।

परिजनों और रिश्तेदारों ने कोविड-19 से बचाव के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पीपीई किट में मुखर्जी को अंतिम विदाई दी। प्रणब के पुत्र अभिजीत मुखर्जी ने उनका अंतिम संस्कार किया।

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इससे पहले मुखर्जी का पार्थिव शरीर फूलों से सजे वाहन में श्मशान गृह लाया गया। उनके पार्थिव शरीर पर तिरंगा लिपटा हुआ था।

उल्लेखनीय है कि 84 वर्षीय मुखर्जी का सोमवार शाम को दिल्ली छावनी स्थित सेना के रिसर्च ऐंड रेफरल अस्पताल में निधन हो गया था। वह 21 दिनों से अस्पताल में भर्ती थे।

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मुखर्जी के निधन के बाद दुनिया भर में उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तीनों सेनाओं के प्रमुखों सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और कई गणमान्य व्यक्तियों ने यहां मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

अस्पताल से पूर्व राष्ट्रपति के पार्थिव शरीर को फुलों से सुसज्जित एक सफेद वाहन में आज उनके सरकारी निवास 10, राजाजी मार्ग लाया गया, जहां गणमान्य व्यक्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

केंद्र सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति के निधन पर 31 अगस्त से छह सितंबर तक सात दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है।

लंबे समय तक कांग्रेस के नेता रहे मुखर्जी की गिनती सार्वजनिक जीवन में सबसे सम्मानित नेताओं में होती है। इसका नजारा आज उनके सरकारी आवास पर देखने को मिला जब राजनीति से परे सभी दलों के नेता और सामान्य जन ने भी उन्हें भावभीनी विदाई दी।

कोविड महामारी के मद्देनजर मास्क लगाए और उचित दूरी का पालन करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण और हर्ष वर्धन, कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी, भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के महासचिव डी राजा ने भी दिवंगत नेता को श्रद्धासुमन अर्पित किए।

इन नेताओं ने मुखर्जी की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उनका पार्थिव शरीर दूसरे कमरे में रखा गया था।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत, थल सेना अध्यक्ष जनरल एम एम नरवणे, वायु सेना प्रमुख आर के एस भदौरिया, नौसेना प्रमुख करमबीर सिंह सहित अन्य प्रमुख हस्तियों ने भी मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

बड़ी संख्या में आम लोगों और विभिन्न दलों के कार्यकर्ताओं ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति को भारत की प्रगति के लिए उनके प्रयासों की खातिर आने वाली पीढ़ियों द्वारा याद किया जाएगा।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भी एक बैठक में मुखर्जी के निधन पर शोक प्रस्ताव पारित किया। मोदी के नेतृत्व में मंत्रिमंडल ने दिवंगत नेता की याद में दो मिनट का मौन रखा।

मंत्रिमंडल ने कहा, ‘‘मंत्रिमंडल भारत के पूर्व राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करता है। उनके निधन से देश ने एक प्रतिष्ठित नेता और एक उत्कृष्ट सांसद को खो दिया है।’’

प्रस्ताव में कहा गया है, ‘‘मंत्रिमंडल देश के लिए श्री प्रणव मुखर्जी की सेवाओं की गहरी सराहना करता है और सरकार और पूरे देश की ओर से उनके शोक संतप्त परिवार के सदस्यों के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त करता है।’’

राजा ने पत्रकारों से कहा, ‘‘लोग उनसे सहमत हों या असहमत, वह मुखरता से राष्ट्रहित में अपने विचार रखते थे। ’’

राज्यसभा के सदस्य और भाजपा नेता विजय गोयल ने कहा कि मुखर्जी ने कभी सत्ताधारी और विपक्षी दल के नेताओं में फर्क नहीं किया।

अभिजीत ने मुखर्जी के अपने गांव से लगाव और निकटता को देखते हुए कहा, ‘‘जांगीपुर में अपने घर में उनकी याद में मैं संग्रहालय, जिसमें पुस्तकालय भी हो, का निर्माण करने की योजना बना रहा हूं।’’

मुखर्जी के पैतृक गांव मिराती में भी लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। ग्रामीणों ने कहा कि गांव ने अपना अभिभावक खो दिया है।

मिराती से काफी दूर चीन में भी उन्हें श्रद्धांजलि दी गयी।

चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा, ‘‘पूर्व राष्ट्रपति मुखर्जी भारत के दिग्गज राजनेता थे। 50 वर्ष की राजनीतिक यात्रा में उन्होंने चीन-भारत संबंधों में सकारात्मक योगदान दिया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह भारत और चीन की मित्रता तथा भारत के लिए भारी क्षति है। हम उनके निधन पर गहरा शोक प्रकट करते हैं और भारत सरकार तथा उनके परिवार के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हैं।’’

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवाद जो बाइडेन सहित कई अमेरिकी नेताओं ने भी मुखर्जी को श्रद्धांजलि दी।

सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सीन लूंग ने अपने भारतीय समकक्ष नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा और मुखर्जी के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने मुखर्जी को एक वास्तविक राजनेता बताया जिन्होंने विदेश में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

मुखर्जी 2012 से 2017 तक देश के 13वें राष्ट्रपति रहे। लंबे समय तक कांग्रेस के नेता रहे मुखर्जी सात बार सांसद भी रहे। भाजपा-नीत केंद्र सरकार ने साल 2019 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘‘भारत रत्न’’ से नवाजा था।

पश्चिम बंगाल में जन्मे इस राजनीतिज्ञ को चलता फिरता ‘इनसाइक्लोपीडिया’ कहा जाता था और हर कोई उनकी याददाश्त क्षमता, तीक्ष्ण बुद्धि और मुद्दों की गहरी समझ का मुरीद था।

उन्होंने इंदिरा गांधी, पी वी नरसिंह राव और मनमोहन सिंह जैसे प्रधान मंत्रियों के साथ काम किया।

राष्ट्रपति के रूप में भी उन्होंने एक अमिट छाप छोड़ी। इस दौरान उन्होंने दया याचिकाओं पर सख्त रुख अपनाया। उनके सम्मुख 34 दया याचिकाएं आईं और इनमें से 30 को उन्होंने खारिज कर दिया।

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