घर लौट रहे प्रवासियों के मुद्दे पर राजनीतिक विवाद कांग्रेस ने किराया देने की पेशकश की
जमात

नयी दिल्ली, चार मई लॉकडाउन की वजह से अलग -अलग राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाने के मुद्दे पर सोमवार को राजनीतिक वाद-विवाद शुरू हो गया। एक ओर कांग्रेस ने फंसे हुए प्रवासी कामगारों से धन वसूलने का आरोप लगाते हुए घर लौट रहे प्रवासी मजदूरों का किराया देने का प्रस्ताव किया, वहीं दूसरी ओर, भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि रेलगाड़ियों से लौट रहे मजदूरों की यात्रा का 85 प्रतिशत खर्च रेलवे वहन कर रहा है और केवल 15 प्रतिशत राशि राज्य सरकारों से ली जा रही है।

भाजपा ने कांग्रेस पर लोगों की अव्यवस्थित आवाजाही को प्रोत्साहित करने का आरोप लगाया और कहा कि इससे कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से फैलेगा जैसा कि इटली में देखा गया। पार्टी ने सवाल किया कि क्या कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी यही चाहती हैं?

कांग्रेस के अलावा माकपा, नेशनल कांफ्रेंस और लोकतांत्रिक जनता दल सहित अन्य विपक्षी पार्टियों ने भी मजदूरों के अपने पैतृक स्थान लौटने का खर्च वहन नहीं कर पाने की खबरों के बीच केंद्र सरकार की आलोचना की।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार और भारतीय रेलवे पर आरोप लगाया कि उन्होंने प्रवासी कामगारों और मजदूरों को सुरक्षित और मुफ्त यात्रा सुनिश्चित कराने की कांग्रेस की मांग की अनदेखी की। उन्होंने सोमवार को घोषणा की कि पार्टी की राज्य इकाइयां देश के विकास में योगदान देने वाले इन प्रवासियों के प्रति एकजुटता प्रकट करने के लिए विभिन्न इलाकों में फंसे जरूरतमंद प्रवासियों को अपने घर जाने के लिए रेल किराये पर होने वाले खर्च में ‘‘मामूली योगदान’’ देंगी।

कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी सोनिया गांधी द्वारा सरकार पर किए गए हमले का समर्थन किया और मांग की कि गरीब लोगों से पैसा वसूलने के बजाय उन्हें मुफ्त में वापस लाया जाए। उन्होंने ‘‘प्रधानमंत्री केयर्स फंड’’ का इस्तेमाल प्रवासियों को लाने में करने की भी मांग की।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘‘ एक तरफ रेलवे दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों से किराया वसूल रहा है वहीं दूसरी तरफ रेल मंत्रालय प्रधानमंत्री नागरिक सहायता एवं आपात स्थिति राहत कोष में 151 करोड़ रुपये का चंदा दे रहा है। जरा ये गुत्थी सुलझाइए!’’

भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि रेलवे प्रवासी कामगारों को लाने के लिए चलाई जा रही श्रमिक विशेष रेलगाड़ी के टिकट पर 85 प्रतिशत की सब्सिडी दे रहा है और शेष 15 प्रतिशत राशि राज्य सरकारों को देना है।

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ट्वीट किया, ‘‘राहुल गांधी जी मैंने केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देश संलग्न किए है, जिसमें साफ-साफ लिखा है 'किसी भी स्टेशन पर कोई भी टिकट नहीं बेचा जाएगा।' रेलवे ने 85 प्रतिशत की सब्सिडी दी है और राज्य सरकारें 15 फीसदी का भुगतान करेंगी। राज्य सरकार टिकट के पैसों का भुगतान कर सकती हैं (मध्य प्रदेश सरकार भुगतान कर रही है)। कांग्रेस शासित राज्यों से ऐसा ही करने के लिए कहिए।''

भाजपा नेता ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक 'श्रमिक एक्सप्रेस' में गंतव्य तक पहुंचने के लिए लगभग 1,200 टिकट रेलवे द्वारा संबंधित राज्य सरकार को सौंपे जाते हैं। राज्य सरकारों को टिकट का पैसा देकर कामगारों में वितरित करना होता है।

भाजपा के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के प्रभारी अमित मालवीय ने सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया, ‘‘कांग्रेस इस बात से जाहिर तौर पर परेशान है कि भारत कोविड-19 से कितने ढंग से निपट रहा है। वे असल में अधिक लोगों को इससे पीड़ित होते हुए और मरते हुए देखना चाहते होंगे। लोगों की बेतरतीब आवाजाही से संक्रमण तेजी से फैलेगा, जैसा कि हमने इटली में देखा था। क्या यही सोनिया गांधी चाहती हैं? ”

भाजपा महासचिव (संगठन) बी एल संतोष ने ट्वीट किया कि केवल राजस्थान, महाराष्ट्र और केरल सरकारों ने प्रवासी श्रमिकों की यात्रा के लिए एक हजार रुपये का भुगतान किया है।

विपक्षी पर जवाबी हमला तेज करते हुए भाजपा महासचिव (संगठन) बी एल संतोष ने ट्वीट किया कि केवल राजस्थान, महाराष्ट्र और केरल सरकारों ने ही प्रत्येक प्रवासी श्रमिक से यात्रा के लिए एक हजार रुपये लिया।

उन्होंने कई ट्वीट कर कहा,‘‘ कांग्रेस पहली में सरकार चला रही है, दूसरी में साझेदार है और तीसरे की प्रवर्तक है। (वह) सुबह उठते ही बयान जारी करती है और कहती है कि वह भुगतान करेगी। ’’ भाजपा नेता ने दावा किया कि त्रिपुरा, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ और झारखंड सरकारों ने रेलगाड़ी की यात्रा का भुगतान या तो अपने प्रवासियों के लिए किया है या तो उनके राज्यों से शुरू होनी वाली रेलगाड़ियों के लिए किया है।

संतोष ने सवाल किया, ‘‘क्या जिन राज्यों में इन प्रवासी कामगारों ने दिनों, महीनों, सालों कड़ी मेहनत की क्या उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं है।’’ उन्होंने लोगों से कोई निष्कर्ष निकालने से पहले इन तथ्यों पर विचार करने की अपील की।

इस बीच, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि फंसे हुए लोगों को पहुंचाने के लिए विशेष रेलगाड़ी चलाने की अनुमति कुछ राज्यों के अनुरोध के आधार पर दी गई।

उन्होंने कहा, ‘‘केंद्र सरकार ने कभी भी कामगारों से किराया वसूलने की बात नहीं की। किराये का 85 प्रतिशत हिस्सा रेलवे वहन करेगा और 15 प्रतिशत संबंधित राज्य देंगे।

भारतीय रेलवे ने आधिकारिक रूप से इस बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है लेकिन सूत्रों ने इस पूरे विवाद को राजनीतिक करार दिया। उन्होंने यह भी बताया कि अबतक चलाई गई 45 श्रमिक विशेष रेलगाड़ियों का भुगतान महाराष्ट्र, केरल और कर्नाटक को छोड़कर उन राज्यों ने दिया है जहां से इन रेलगाड़ियों ने चलना शुरू किया था।

सूत्रों ने बताया कि राजस्थान, तेलंगाना और गुजरात जैसे राज्यों ने, जहां पर श्रमिक विशेष रेलगाड़ियां शुरू हुई, श्रमिकों की ओर से भुगतान किया जबकि झारखंड जहां पर ये विशेष रेलगाड़ियां आईं उसने भी श्रमिकों के लिए भुगतान किया।

उन्होंने बताया कि गुजरात सरकार ने प्रवासी कामगारों की ओर से भुगतान करने के लिए गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) की मदद ली है।

सूत्रों ने बताया कि महाराष्ट्र, केरल और कर्नाटक जहां से दूसरे राज्यों के लिए ट्रेनों का परिचालन किया गया वहां प्रवासियों से यात्रा के लिए पैसे लिए गए।

तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने कहा, ‘‘ कभी मत भूलिये की इस सरकार ने महज चार घंटे की नोटिस पर 21 दिनों का लॉकडाउन घोषित किया। रेलवे का दिशानिर्देश पढ़िए जिसमें साफ तौर पर लिखा गया है कि प्रवासियों को भेजने वाले राज्यों को पैसा एकत्र करना होगा। इसका मतलब है कि प्रवासी कामगारों से पैसा एकत्र करना है। यह गैर सहयोगी संघवाद का बेहतरीन उदाहरण है। सरकार का आसान सिद्धांत है- जब स्थिति ठीक हो तो केंद्र श्रेय ले और स्थिति खराब हो तो बोझ राज्यों पर डाल दी जाए।’’

सरकार से प्रधानमंत्री केयर्स कोष का सार्थक उपयोग और इसका इस्तेमाल प्रवासी कामगारों की श्रमिक विशेष रेलगाड़ी में करने का आह्वान करते हुए भाकपा महासचिव डी राजा ने कहा, ‘‘प्रवासियों को मुफ्त में घर पहुंचाना चाहिए और केंद्र सरकार को न केवल उनकी यात्रा के लिए भुगतान करना चाहिए बल्कि अन्य आवश्यक सुविधाएं भी मुहैया कराई जानी चाहिए।’’

माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने ट्वीट किया, ‘‘ जैसा नाम से ही प्रतीत होता है कि नया कोष विशेष तौर पर उनके लिए है जिनकी परवाह मोदी करते हैं। गरीब सबसे अधिक प्रभावित हैं जो धन सृजित करते हैं लेकिन वह उनकी परवाह नहीं करते। बेपरवाह, क्रूर और आपराधिक।’’ इसके साथ ही माकपा नेता ने कार्टून भी ट्वीट किया जिसमें गरीब कामगार कह रहे हैं कि वे भी एनआरआई (नॉट रिक्वायर्ड इंडियंस अथवा गैर जरूरी भारतीय) हैं।

नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट किया, ‘‘यदि आप कोविड-19 संकट के दौरान विदेश में फंसे हुए हैं तो यह सरकार आपको विमान से निशुल्क वापस लायेगी लेकिन यदि आप एक प्रवासी श्रमिक हैं और किसी अन्य राज्य में फंसे हैं तो आप यात्रा का किराया (सामाजिक दूरी की कीमत के साथ) चुकाने के लिए तैयार रहें। ‘पीएम केयर्स’ कहां गया? ’’

विपक्षी नेता शरद यादव ने कहा कि संकट के इस समय में प्रवासी कामगारों से रेलगाड़ी का किराया देने के लिए नहीं कहा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्ग सरकार की उदासीनता की कीमत चुका रहे हैं। यादव ने कहा कि अगर लॉकडाउन योजना के तहत लागू किया जाता तो ऐसा नहीं होता।

उन्होंने रेलवे से मांग की कि प्रवासियों का किराया रेलवे दे क्योंकि राज्यों के राजस्व में पहले ही भारी कमी आई है।

केंद्र सरकार उस समय आलोचकों के निशाने पर आई जब रेलवे द्वारा जारी परिपत्र में कहा गया कि स्थानीय राज्य सरकारों का प्रशासन उनके द्वारा दिए गए टिकटों को प्रवासी कामगारों में बांटेगा और किराया एकत्र कर रेलवे को जमा कराएंगे।

कांग्रेस अध्यक्ष के फैसले को ऐतहासिक करार देते हुए अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (एआईसीसी) के महासचिव केसी वेणुगोपाल और मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ‘‘झूठी शान’’ छोड़ घर लौटने के इच्छुक प्रवासियों के यात्रा व्यय का भुगतान करने के लिए सामने आने का आह्वान किया।

कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने कहा कि पार्टी के फैसले से सरकार को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा।

भाजपा द्वारा की जा रही आलोचना पर वेणुगोपाल ने कहा, ‘‘ हम इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करना चाहते हैं। यह राजनीति करने का समय नहीं है। जिनके पास पैसे नहीं है वे इन रेलगाड़ियों में यात्रा नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए हमारी कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस समिति ने उनके लिए भुगतान किया। यही हाल केरल में है जहां प्रवासियों के पास किराया देने के लिए पैसे नहीं है।’’

इस बीच, सोमवार की सुबह दो विशेष रेलगाड़ी महाराष्ट्र में फंसे करीब दो हजार प्रवासी कामगारों को लेकर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर पहुंची।

रेलवे मेल/एक्सप्रेस का शयनयान का किराया वसूल रहा है। इसके अलावा 30 रुपये सुपरफास्ट शुल्क और 20 रुपये अतिरिक्त शुल्क श्रमिक विशेष ट्रेन के लिए ले रहा है।

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