चेन्नई, 24 जुलाई मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा है कि पैरोल पर जेल से बाहर आए कैदियों या उनके परिजनों से यदि कोई पुलिस अधिकारी धन लेता है या धन की मांग करता है तो इसे रिश्वत की श्रेणी में रखा जाएगा और यह भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दंडनीय होगा।
सलेम जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक कैदी को बृहस्पतिवार को 10 दिन की पैरोल देते हुए न्यायमूर्ति एन कीरूबाकरण और न्यायमूर्ति वी एम वेलूमणि की खंडपीठ ने तमिलनाडु सरकार को जेल के नियमों में थोड़ी ढील देने का निर्देश दिया ताकि कैदियों के पैरोल आवेदन का निपटारा दो सप्ताह की निश्चित अवधि में किया जा सके।
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पीठ ने कहा, “समयसीमा का उल्लंघन किए जाने को अदालत की अवमानना माना जाएगा और नियमों का अनुपालन नहीं करने की वजह से होने वाले मुकदमों का खर्च संबंधित अधिकारी को वहन करना होगा।’’
कैदी को अपनी पत्नी के इलाज के खर्च की व्यवस्था करनी थी इसलिए उसने पैरोल की याचना की थी।
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न्यायालय ने कहा, “अदालत के संज्ञान में आया है कि कैदी के साथ जाने वाले पुलिसकर्मी इसके लिए धन ले रहे हैं। यदि ऐसा हो रहा है तो यह गैरकानूनी है और इसे घूस की श्रेणी में रखा जाएगा।”
पीठ ने कहा कि यह स्पष्ट किया जाता है कि यदि ऐसी कोई घटना अदालत के सामने लाई जाती है तो उस पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
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