नयी दिल्ली, सात जुलाई भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने हरियाणा में निजी क्षेत्र की नौकरियों में प्रदेशवासियों को 75 फीसदी आरक्षण दिए जाने के प्रस्ताव को देश की एकता एवं अखंडता के लिए चुनौती करार देते हुए मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मनोहर लाल खट्टर सरकार के इस निर्णय पर रोक लगाने के लिए कदम उठाना चाहिए।
भाकपा के राष्ट्रीय सचिव अतुल कुमार अनजान ने एक बयान में कहा, ‘‘ हरियाणा सरकार द्वारा राज्य में निजी क्षेत्र की नौकरियों में प्रदेश के लोगों को 75 फ़ीसदी आरक्षण देने के प्रस्तावों ने एक गंभीर संकट पैदा कर दिया है। यह भारत के संविधान और देश की एकता और अखंडता के लिए चुनौती बनकर उभरेगा।’’
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उन्होंने कहा कि दो दशक पूर्व महाराष्ट्र में शिवसेना द्वारा सिर्फ मराठियों को रोजगार देने का मामला उठाया गया था और उसके लिए आंदोलन भी चलाए गए थे। उस समय भारतीय जनता पार्टी सहित सभी दलों ने इस तरह के ‘संकीर्ण, विघटनकारी विचारों’ की आलोचना की थी।
अनजान ने आरोप लगाया, ‘‘ भाजपा हरियाणा से संकीर्णतावाद की एक नई मुहिम शुरू कर रही है। देश में रोजगार के अवसर उत्पन्न करना समय की आवश्यकता है।’’
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उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री से अपील की है कि वह हरियाणा राज्य के इस निर्णय को गंभीरता से लें और उसे तत्काल रोकने की दिशा में कदम उठाएं।’’
गौरतलब है कि हरियाणा मंत्रिमंडल ने निजी क्षेत्र की नौकरियों में राज्य के युवकों को 75 फ़ीसदी आरक्षण दिये जाने संबंधी अध्यादेश लाने के प्रस्ताव को सोमवार को मंजूरी दे दी।
अगली बैठक में मंत्रिपरिषद के समक्ष अध्यादेश का मसौदा रखा जाएगा।
भाजपा के साथ प्रदेश में गठबंधन सहयोगी दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी ने चुनावों में मुख्य रूप से निजी क्षेत्र की नौकरियों में प्रदेश के युवाओं को 75 फ़ीसदी आरक्षण दिलाने का वादा किया था।
हक
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