तिरवनंतपुरम, 25 अप्रैल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी में मंगलवार को यहां आयोजित एक कार्यक्रम की शुरुआत आठ दशक से अधिक पुराने मलयालम देशभक्ति गीत से हुई, जिसे राज्य सरकार ने केरल का सांस्कृतिक गीत घोषित किया है।
यह संभवत: पहली बार है जब 1938 में स्वतंत्रता सेनानी-कवि बोधेश्वरन द्वारा लिखित ‘केरलागानम’ को पिछले साल राज्य सरकार के निर्देश के बावजूद विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी वाले किसी बड़े कार्यक्रम की शुरुआत में प्रस्तुत किया गया।
गायकों के एक समूह ने सेंट्रल स्टेडियम में समारोह की शुरुआत करते हुए अपनी मधुर आवाज में यह कविता सुनाई। मोदी ने इसी कार्यक्रम में वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई और कई प्रमुख परियोजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास किया।
‘‘जय जय कोमल केरल धरणी’ से शुरू होने वाली 25 पंक्तियों की इस कविता को 2014 में केरल का सांस्कृतिक गीत घोषित किया गया था। आमतौर पर किसी भी सांस्कृतिक कार्यक्रम में यह गीत कभी नहीं गाया जाता।
राज्य के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री साजी चेरियन ने जुलाई 2022 में घोषणा की थी कि कविता को दक्षिणी राज्य में आयोजित होने वाले सभी सांस्कृतिक कार्यक्रमों के उद्घाटन गीत के रूप में गाया जाएगा।
राज्य के गठन के बाद केरल विधानसभा की पहली बैठक में ‘केरलागानम’ गाया गया था। फिर इसे आकाशवाणी के कलाकार शारदामणि और राधामणि द्वारा गाया गया, जिन्हें परवूर बहनों के नाम से जाना जाता है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)











QuickLY