(कुमार राकेश)
वाशिंगटन, 23 जून प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को संयुक्त राष्ट्र समेत अन्य बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार की पुरजोर वकालत की।
अमेरिका के साथ भारत के संबंधों के बारे में खुलकर बात करते हुए कहा कि दोनों देशों के रिश्तों के लिए यह एक नयी सुबह है, जो न केवल उनकी, बल्कि पूरी दुनिया की नियति को आकार देगी।
मोदी बृहस्पतिवार को अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र को दूसरी बार संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन गए।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें बहुपक्षवाद को पुनजीर्वित करना होगा और बेहतर संसाधनों तथा प्रतिनिधित्व के साथ बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार करना होगा। यह बात शासन से जुड़े हमारे सभी वैश्विक संस्थानों पर लागू होती है, खासतौर से संयुक्त राष्ट्र पर। जब दुनिया बदल गई है, तो हमारे संस्थानों को भी बदलना चाहिए।’’
मोदी ने महात्मा गांधी और मार्टिन लूथर किंग जूनियर को श्रद्धांजलि देते हुए कहा, ‘‘हम स्वतंत्रता, समानता और न्याय के लिए काम करने वाले कई अन्य लोगों को भी याद करते हैं।’’
प्रधानमंत्री ने अमेरिका में भारतीय-अमेरिकियों की उपलब्धि की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत-अमेरिका सहयोग का दायरा अनंत है, हमारे समन्वय की क्षमता असीमित है और हमारे संबंधों का तालमेल सहज है।
उन्होंने दोनों देशों के साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और दूरदृष्टि का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में 2,500 से अधिक राजनीतिक दल हैं और देश के विभिन्न राज्यों में 20 अलग-अलग दलों का शासन है।
प्रधानमंत्री ने अपने नेतृत्व में भारत में लोकतंत्र के पतन के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा, ‘‘हमारी 22 आधिकारिक एं और हजारों बोलियां हैं, फिर भी हम एक सुर में बोलते हैं। दुनियाभर के सभी धर्मों के लोग हमारे यहां रहते हैं और हम उन सभी के त्योहारों का जश्न मनाते हैं। भारत में विविधता जीवन का एक स्वाभाविक हिस्सा है।’’
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