नयी दिल्ली, 15 सितंबर केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी चौबे ने मंगलवार को जानकारी दी कि आईसीएमआर और कैडिला हेल्थेयर लिमिटेड के साथ मिलकर भारत बॉयोटेक द्वारा किए गए पहले चरण के परीक्षण में खुलासा हुआ है कि स्वदेशी आधार पर विकसित किए गये इसके दो कैण्डिडेट वैक्सीन ‘‘उत्कृष्ट सुरक्षा’’ सुरक्षा वाले हैं।
राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में आईसीएमआर और निजी शोध केंद्रों द्वारा कोरोना के लिए नैदानिक परीक्षणों की स्थिति का ब्यौरा देते हुए चौबे ने कहा कि उनके द्वितीय चरण के नैदानिक परीक्षण चल रहे हैं।
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चौबे ने यह भी बताया कि रूस द्वारा विकसित रिकॉमबिनान्ट वैक्सीन के सहयोग के संबंध में विचार- विर्मश चल रहा है। हालांकि इस बारे में कोई औपचारिक अध्ययन प्रारंभ नहीं किया गया है।
उन्होंने बताया कि सीरम इस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) और आईसीएमआर ने दो वैश्विक वैक्सीन केंडिडेट्स के नैदानिक विकास के लिए साझेदारी की है।
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उन्होंने कहा कि सीएचएडीओएक्स1- एस जो कि ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित एक नॉन रेप्लिकेटिंग वायरल वेक्टर वैक्सीन है। उन्होंने कहा, ‘‘यह वैक्सीन ब्राजील में तीसरे चरण के नैदानिक परीक्षण में है। आईसीएमआर ने 14 नैदानिक परीक्षण स्थलों पर चरण दो और तीन के ब्रिजिंग अध्ययनों की शुरूआत की है।
चौबे ने बताया कि आईसीएमआर और एसआईआई ने यूएसए से नोवाक्स द्वारा विकसित ग्लाईकोप्रोटीन सबयूनिट नैनोपार्टिकल एड्जुविटेड वैक्सीन के नैदानिक विकास हेतु भी साझेदारी की है।
उन्होंने कहा कि सरकार और उद्योग जगत शीघ्रातिशीघ्र कोविड- 19 की सुरक्षित एंव प्रभावी वैक्सीन उपलब्ध कराने के लिए बेहतर प्रयास कर रहे है।
टीके की उपलब्धता के बारे में पूछे गये प्रश्न पर में चौबे ने बताया, ‘‘वैक्सीन के विकास में निहित विभिन्न जटिलताओं को देखते हुए निश्चित समय सीमा के बारे में टिप्पणी करना मुश्किल है।’’
ब्रजेन्द्र
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